एनआईटीडीआरडी को मिला ‘जीरो वेस्ट टू लैंडफिल’ दर्जा

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय क्षय एवं श्वसन रोग संस्थान (एनआईटीडीआरडी) को ‘जीरो वेस्ट टू लैंडफिल’ का दर्जा दिया है। स्वच्छ भारत मिशन अर्बन 2.0 के तहत शुरू की गई इस पहल ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सतत अपशिष्ट प्रबंधन का नया मानक स्थापित किया है। संस्थान ने अपशिष्ट पृथक्करण, पुनर्चक्रण और कम्पोस्टिंग की व्यापक व्यवस्था लागू कर पर्यावरणीय जिम्मेदारी के लिए उल्लेखनीय काम किया है।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के अनुसार दिल्ली नगर निगम (दक्षिणी क्षेत्र) के सहयोग से व्हाई वेस्ट वेडनेस्डेज़ फाउंडेशन ने अपने प्रमुख कार्यक्रम ‘स्वच्छ संकल्प’ के तहत इस परियोजना को लागू किया। परियोजना की शुरुआत विस्तृत अपशिष्ट ऑडिट और बेसलाइन सर्वे से हुई, जिसके आधार पर संस्थान की अपशिष्ट उत्पादन प्रणाली का आकलन कर लक्षित हस्तक्षेप तैयार किए गए। इसके बाद अस्पताल कर्मियों और स्टाफ के लिए लगभग 50 जागरूकता सत्र आयोजित किए गए, जिससे अपशिष्ट प्रबंधन की संस्कृति विकसित हुई।
उल्लेखनीय है कि 27 एकड़ में फैले इस संस्थान से प्रतिदिन लगभग 1 से 1.2 टन अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जिसमें 500 से 650 किलोग्राम गीला कचरा शामिल है। इसके प्रबंधन के लिए वेट वेस्ट कम्पोस्टिंग सेंटर, ड्राई वेस्ट रिसोर्स सेंटर और हॉर्टिकल्चर वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा 40 गाइया कम्पोस्टिंग बिन और दो हॉर्टिकल्चर वेस्ट श्रेडर लगाए गए हैं, साथ ही एक समर्पित मॉनिटरिंग स्टेशन भी बनाया गया है।
मेहरौली वार्ड में दिल्ली नगर निगम की दक्षिणी क्षेत्र टीम ने 40 एयरोबिन कम्पोस्टिंग यूनिट्स का उद्घाटन कर इस उपलब्धि को औपचारिक रूप दिया है। एनआईटीडीआरडी की यह पहल स्वास्थ्य क्षेत्र में सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण है।

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