अहमदाबाद के धंधुका में हिंसा के बाद चला बुलडोजर, हत्यारोपियों के घरों की बिजली काटी

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अहमदाबाद{ गहरी खोज }: गुजरात के अहमदाबाद जिले के धंधुका शहर में मंगलवार को प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान तेज कर दिया। यह कदम हाल ही में हुई एक जानलेवा चाकूबाजी की घटना के बाद उठाया गया है, जिससे इलाके में तनाव और अशांति का माहौल बन गया था।
प्रशासन ने शहर के कई हिस्सों में बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाना शुरू किया। खासतौर पर रेलवे स्टेशन से लेकर रणपुर चौराहे तक सड़क किनारे बने अवैध ढांचों को ढहाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस मार्ग पर करीब 14 दुकानों के शेड अवैध पाए गए हैं, जिन्हें हटाया गया।
इसी दौरान बिजली विभाग ने भी कार्रवाई करते हुए वर्ष 2022 के किशन भरवाड़ हत्याकांड के आरोपी शब्बीर चोपड़ा और इम्तियाज पठान के घरों की बिजली काट दी। अधिकारियों ने बताया कि इन मामलों में बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 135 के तहत केस दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
अहमदाबाद ग्रामीण की उप पुलिस अधीक्षक आस्था राणा ने बताया कि इलाके में चल रहे इस अभियान के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। उन्होंने कहा कि फिलहाल आरोपियों के खिलाफ बिजली काटने की कार्रवाई की गई है, लेकिन जांच जारी है और आने वाले समय में अन्य जरूरी कदम भी उठाए जाएंगे।
इस पूरे अभियान में सड़क और भवन विभाग, राजस्व विभाग, पुलिस, नगरपालिका, सिटी सर्वे विभाग, बिजली कंपनी यूजीवीसीएल, अग्निशमन और चिकित्सा सेवाओं की टीमें शामिल हैं। भारी सुरक्षा व्यवस्था के कारण शहर के कई हिस्से पुलिस नियंत्रण में नजर आ रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानून व्यवस्था बनाए रखने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से की जा रही है, ताकि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
खटकीवाड़ इलाके में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पांच रिहायशी संपत्तियों को खाली कराना शुरू कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, इससे पहले कई यूनिट्स को नोटिस जारी किए गए थे, जिनमें फेदरा-धंधुका हाईवे के किनारे स्थित करीब 12 यूनिट्स भी शामिल थीं। धंधुका नगर पालिका के मुख्य अधिकारी राजू शेख ने साफ किया कि यह अभियान सीधे तौर पर हालिया घटना के आरोपियों की संपत्तियों पर केंद्रित नहीं है, बल्कि उन ढांचों पर कार्रवाई की जा रही है जिनका संबंध हिस्ट्रीशीटरों से है।
प्रशासन की यह सख्त कार्रवाई हाल ही में धर्मेश गामरा की हत्या के बाद शुरू की गई है। जानकारी के अनुसार, धर्मेश की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। बताया जा रहा है कि यह विवाद एक मामूली सड़क दुर्घटना से शुरू हुआ, जिसमें मोटरसाइकिलों की टक्कर के बाद कहासुनी हुई और मामला बढ़ते-बढ़ते हिंसक झड़प में बदल गया।
इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और बड़े पैमाने पर हिंसा देखने को मिली। उपद्रवियों ने कई दुकानों में आग लगा दी और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस और प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए हत्या के आरोप में समीर और रिजवान को गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा, हिंसा में शामिल होने के शक में कम से कम 20 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। एक एफआईआर हत्या और उससे जुड़े अपराधों के लिए दर्ज की गई है, जबकि दूसरी एफआईआर 120 से अधिक लोगों के खिलाफ दंगा करने, अवैध रूप से इकट्ठा होने और सरकारी व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में दर्ज की गई है। जांच टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है और घटनाक्रम को समझने के लिए आरोपियों को अलग-अलग जगहों पर ले जाकर पूछताछ की है, जिसमें वह स्थान भी शामिल है जहां हत्या की वारदात हुई थी। प्रशासन ने इस पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। अधिकारियों का कहना है कि अब स्थिति नियंत्रण में है और धीरे-धीरे इलाके में सामान्य स्थिति बहाल हो रही है।

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