प्रधानमंत्री मोदी-राष्ट्रपति ली की वार्ता में भारत-कोरिया आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने पर जोर
नयी दिल्ली { गहरी खोज } : दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्यूंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता में नरेंद्र मोदी ने भारत-कोरिया आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का सहयोग व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए लिखा, “भारत-कोरिया व्यापारिक नेताओं के संवाद ने विभिन्न क्षेत्रों में हमारी आर्थिक साझेदारी की अपार संभावनाओं को उजागर किया है।”भारत और दक्षिण कोरिया, दोनों ही समृद्ध समुद्री परंपराओं वाले राष्ट्र हैं। समुद्री उद्योगों के क्षेत्र में इनके व्यापक साझा हित और पूरक क्षमताएं स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि और उसकी अर्थव्यवस्था के बढ़ते अंतर्राष्ट्रीयकरण के साथ, समुद्री क्षेत्र देश की सुरक्षा और समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है।
दोनों पक्षों ने माना कि ‘मैरीटाइम अमृत काल 2047 विजन’ के तहत भारत की समुद्री योजनाओं ने दक्षिण कोरिया जैसे दोस्त देश के साथ लंबे समय तक सहयोग के कई नए मौके पैदा किए हैं। दक्षिण कोरिया जहाज निर्माण और समुद्री क्षेत्र में काफी आगे है, इसलिए दोनों देश मिलकर शिपबिल्डिंग, बंदरगाह विकास और समुद्री लॉजिस्टिक्स में काम कर सकते हैं। इससे न सिर्फ आर्थिक फायदा होगा, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच समझ और साझेदारी और मजबूत होगी।
भारतीय पक्ष ने कोरिया को बताया कि भारत में बड़े स्तर पर नए (ग्रीनफील्ड) शिपबिल्डिंग क्लस्टर बनाने के अच्छे मौके हैं। इसके लिए सरकार की ‘जहाज निर्माण विकास योजना’ और राज्य सरकारों व भारतीय वित्तीय संस्थानों की तरफ से कई तरह की सुविधाएं और प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं।
भारत ने कोरिया की बड़ी शिपबिल्डिंग कंपनियों को इन प्रोजेक्ट्स में टेक्निकल और स्ट्रैटेजिक पार्टनर के तौर पर शामिल होने का न्योता दिया, ताकि डिजाइन, उत्पादन, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, क्वालिटी और सेफ्टी जैसे क्षेत्रों में उनका अनुभव काम आ सके। इस पर कोरियाई पक्ष ने उम्मीद जताई कि बिजनेस सेक्टर की भागीदारी से यह सहयोग और आगे बढ़ेगा।
