बंगाल चुनाव में कॉलेज शिक्षकों की ड्यूटी रद्द करने के फैसले को चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में दी चुनौती

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कोलकाता{ गहरी खोज }: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती देते हुए उसी अदालत की डिवीजन बेंच का रुख किया, जिसमें आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दो चरणों के लिए कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने के चुनाव आयोग के फैसले को रद्द कर दिया गया था।
कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच के जस्टिस कृष्णा राव ने 17 अप्रैल को आगामी चुनावों के लिए कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने के ईसीआई के आदेश को रद्द कर दिया था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जिन कॉलेज शिक्षकों ने इस मामले में पहले ही जरूरी ट्रेनिंग पूरी कर ली है, उन्हें इस बार पीठासीन अधिकारी के तौर पर काम करना होगा।
इसके साथ ही, जस्टिस राव ने आयोग को यह छूट भी दी कि वह कॉलेज शिक्षकों को उनके सर्विस ग्रेड और वेतनमान के हिसाब से अन्य चुनावी कामों के लिए नियुक्त कर सकता है। ईसीआई ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (जिसमें जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता शामिल हैं) का दरवाजा खटखटाया। इस मामले पर सुनवाई की संभावित तारीख मंगलवार है। आयोग ने कुछ दिन पहले एक नोटिफिकेशन जारी कर राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर रैंक के कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी के तौर पर काम करने के लिए नियुक्त किया था।
आयोग ने यह भी घोषणा की थी कि उन्हें पीठासीन अधिकारी के तौर पर काम करने के लिए अलग से ट्रेनिंग दी जाएगी, और उनमें से कई शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग की प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी थी। इस नोटिफिकेशन के बाद कॉलेज शिक्षकों के एक समूह ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और इस तरह की नियुक्तियों के औचित्य पर सवाल उठाए। कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने के पक्ष में आयोग का तर्क यह था कि पिछले चुनावों में भी कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने के उदाहरण रहे हैं और इससे पहले कभी इस फैसले को चुनौती नहीं दी गई थी। पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने हैं। वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी। इसी दिन केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभाओं के चुनावों में डाले गए वोटों की गिनती भी होगी।

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