चीनी टेलीग्राम चैनल से जुड़े ठग गिरोह का पर्दाफाश, बैंक कर्मचारी समेत तीन गिरफ्तार

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: पूर्वी जिले की स्पेशल स्टाफ टीम ने ‘ऑपरेशन साइबर हॉक’ के तहत एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) के जरिए ठगी की रकम इधर-उधर ट्रांसफर कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में बैंक कर्मचारी समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के तार विदेशी हैंडलर्स, खासकर चीनी टेलीग्राम चैनल से जुड़े हुए हैं।
पूर्वी जिले के पुलिस उपायुक्त राजीव कुमार ने गुरुवार को बताया कि इस मामले की शुरुआत एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज एक शिकायत से हुई, जिसमें बरेली निवासी अमन बाबू मौर्य के खाते से 22 फरवरी को 10 हजार रुपये की ठगी की गई थी। जांच के दौरान पुलिस को मयूर विहार फेज-1 स्थित एक बैंक में खोला गया संदिग्ध खाता मिला, जो ‘कंस्ट्रक्शन रॉयल एंटरप्राइज’ के नाम पर था। यह खाता शौकिन नाम के व्यक्ति के नाम पर खुला था। जांच में आगे पता चला कि यह खाता 8 अलग-अलग साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़ा हुआ है। इसके बाद पांडव नगर थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस उपायुक्त के अनुसार पुलिस ने सबसे पहले खाता धारक शौकिन को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने बताया कि उसका भतीजा शाहरुख उर्फ जोजो उसे इस काम में लेकर आया था। इसके बाद शाहरुख को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान शाहरुख ने खुलासा किया कि बैंक का एक कर्मचारी म्यूल अकाउंट खुलवाने में मदद करता था। पुलिस ने छापेमारी कर सिटी यूनियन बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर फ्रांशु कुमार (23) को दबोचा। जांच में सामने आया कि वह पैसों के लालच में फर्जी खाते खुलवाने में मदद करता था।
पुलिस अधिकारी के अनुसार मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपितों के फोन से एक टेलीग्राम चैनल का पता चला, जो विदेशी हैंडलर्स से जुड़ा हुआ है। ये हैंडलर्स म्यूल अकाउंट की जानकारी टेलीग्राम के जरिए लेते थे और ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदल देते थे। आरोपितों के फोन में एक स्क्रीन रिकॉर्डिंग भी मिली है, जिसमें एक चीनी मूल के व्यक्ति के साथ वीडियो कॉल के जरिए बातचीत हो रही है।
आरोपितों से पूछताछ व जांच में पता चला गिरोह के सदस्य एपीके आधारित एसएमएस फॉरवर्डर ऐप इंस्टॉल करते थे, जिससे ओटीपी मैसेज सीधे विदेशी हैंडलर्स तक पहुंच जाते थे। इसके जरिए वे बैंक खातों को पूरी तरह नियंत्रित कर लेते थे और तुरंत पैसे ट्रांसफर कर देते थे। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था। पहले फर्जी खाते खुलवाए जाते, फिर उनकी डिटेल विदेशी हैंडलर्स को भेजी जाती और ठगी की रकम को तेजी से अलग-अलग खातों में घुमाकर क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था। पुलिस अब इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और विदेशी मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

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