महिला आरक्षण के नाम पर ये जल्दीबाज़ी बता रही है कि अब भाजपा जा रही है : अखिलेश यादव

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लखनऊ{ गहरी खोज }: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण को लेकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की इस बिल को लाने की जल्दबाजी बता रही है कि भाजपा जा रही है। उन्होंने भाजपा पर जनगणना टालने की बात कही।
सपा नेता अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर बुधवार को एक पोस्ट की, जिसमें उन्होंने महिला आरक्षण को भाजपा की जल्दबाज़ी से जोड़ते हुए निशाना साधा। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि भाजपा जनगणना को टालना चाहती है क्योंकि जनगणना होगी तो जातिगत जनगणना की भी बात उठेगी और फिर आरक्षण की भी, जो भाजपा नहीं चाहती है। भाजपा को ये भी अच्छी तरह याद है कि ‘पीडीए’ में ‘ए’ का मतलब ‘आधी आबादी’ अर्थात महिला भी है। ये बिल पीडीए का हक़-अधिकार मारने की एक बड़ी साज़िश का हिस्सा है।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि एक बड़ा चुनावी सच ये भी है कि भाजपा की चुनावी घपलेबाजी का अब पूरी तरह से भंडाफोड़ हो गया है। ‘पीडीए प्रहरी’ एक विचार की तरह हर प्रदेश और हर दल ने स्वीकार कर लिया है। भाजपा पर चौकन्नी नज़र रखी जा रही है, इसीलिए अब भाजपा को चुनावी हेराफेरी का कोई और मौका आसानी से नहीं मिलेगा और सच्चे वोट ही, चुनाव का सच्चा नतीजा तय करेंगे। अब हर तरह से भाजपा की कलई खुल गयी है, इसीलिए उसके समर्थक और वोटरों का अकाल पड़ गया है। भाजपा निराशा के इस दौर से उबरने के लिए ये बिल (महिला आरक्षण) ला रही है।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा की यही राजनीतिक चाल रहती है। जब पुराने लोग ये समझ जाते हैं कि भाजपा किसी की सगी नहीं है तो हर बार भाजपा कुछ नये लोगों को अपने लुभावने जुमलों में फंसाती है। इस बार भाजपा महिलाओं को लेकर ये पुरानी चाल चल रही है, लेकिन सफल नहीं होगी, क्योंकि भाजपा राज में सबसे ज़्यादा दुखी तो महिलाएं ही हैं। भाजपा की कमीशनखोरी व चंदा वसूली की वजह से जो महंगाई बढ़ी है उससे उनकी रसोई सूनी हो गयी है। रही-सही कसर सिलेंडर की बेतहाशा बढ़ती क़ीमतों ने पूरी कर दी है। उन्हाेंने कहा कि हर महिला अपने बच्चों को पढ़ाना चाहती है, लेकिन भाजपा की शिक्षा विरोधी सोच तो सरकारी स्कूल तक बंद करवा दे रही है। महिलाओं का दर्द क्या होता है ये मेरठ के दुकानदारों के परिवार की महिलाओं की आँखों में आए आँसू भी बयां कर रहे हैं और नोएडा की मजदूर और मेड के रूँधे गले के बयान भी। अगर ये बिल इतना ही सही है तो इसे मेरठ-नोएडा की पारिवारिक और कामगार महिलाओं के बीच बैठकर घोषित किया जाए।

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