भाजपा का सीएम,बिहार की राजनीति बदलने का संकेत

0
20260414174930_Untitled.jpgniti

सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }:
राजनीति में किसी प्रदेश के राजनीतिक समीकरण बदल देना कोई आसान काम नहीं होता है। वह भी बिहार जैसे देश की राजनीति में अहम स्थान रखने वाले राज्य के राजनीतिक समीकरण बदल देना बहुत ही मुश्किल काम होता है।इसमें समय लगता है और समय लगने के कारण अपने समय का इंतजार करना पड़ता है,धैर्य रखना पड़ता है।बरसों अपने से ज्यादा दूसरे को महत्व देना पड़ता है। दूसरे को आश्वस्त करना पड़ता है कि आपके राजनीतिक दल व नेताओं का महत्व कम नही होगा।बिहार मेें लालू प्रसाद यह काम कर सकते थे लेकिन वह नहीं कर सके लेकिन पीएम मोदी व शाह के नेतृत्व में भाजपा बिहार की राजनीति बदलने जैसा ऐतिहासिक काम करने मे सफल रही है।भाजपा के सम्राट चौधरी का बिहार की सीएम बनना इस बात का संकेत है कि अब राज्य में नए राजनीतिक समीकरण बनने जा रहे हैं।

भाजपा नेता सम्राट चौधरी को मंगलवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नेता चुन लिया गया है। जिससे उनके बिहार का सीएम बनने का रास्ता साफ हो गया है। इससे पहले नीतीश कुमार ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा और मंत्रिमंडल भंग कर दिया।वह राज्यसभा जाने वाले है, इससे राज्य में सत्ता में नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता खुल गया है।भाजपा विरोधियों को इस बात पर हैरानी हो सकती है कि हालिया विधानसभा चुनाव एनडीए गठबंधन ने नीतीश कुमार को सीएम चेहरा घोषित कर लड़ा था। चुनाव के दौरान नारा भी दिया गया था कि पच्चीस से तीस फिर से नीतीश। फिर ऐसा क्या हुआ कि मार्च की शुरुआत में ही नीतीश कुमार ने खुद की राज्यसभा जाने की इच्छा जताई ।

चार महीने के भीतर ऐसा क्या हुआ कि नीतीश कुमार वह नीतीश कुमार जो राज्य की राजनीति छोडऩे को तैयार नहीं होते थे, सीएम से कम पर वह साथ देने को राजी न होते थे,वह चार महीनें सीएम पद छोड़ने कर राज्यसभा में जाने को तैयार हो गए। भाजपा ने नीतीश कुमार को ऐसा क्या समझा दिया है कि वह वही कर रहे हैं जो भाजपा चाहती है। भाजपा तो पहले भी बड़े भाई की भूमिका में आना चाहती थी लेकिन नीतीश कुमार राजी नहीं होते थे। कम सीटें जीतने पर भी भाजपा नीतीश कुमार को ही सीएम बनाने पर मजबूर हो जाती थी।यह बात तो समझ में आती है कि भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए नीतीश कुमार को सीएम का चेहरा बनाया। नीतीश चुनाव जीतने के लिए राजी भी हो गए। लेकिन सीएम पद छोड़ने व राज्य सभा जाने के लिए क्यों तैयार हुए। तैयार हुए हैं तो इसका मतलब साफ है कि भाजपा जो चाहती थी वह नीतीश कुमार ने किया है और नीतीश कुमार जो चाहते हैं, वह भाजपा करने को राजी है।

बिहार की राजनीति में एक वक्त था कि भाजपा को नीतीश कुमार पर भरोसा करना पड़़ता था क्योंकि बिहार की राजनीति में सरकार नीतीश कुमार के बिना बन नहीं सकती थी। सरकार बनाने के लिए भाजपा को नीतीश कुमार की बात माननी पड़ती थी। अब भाजपा ने नीतीश कुमार को यह एहसास दिला दिया है कि अब वक्त बदल गया है जैसे भाजपा ने एक समय में नीतीश कुमार पर भरोसा किया था उसी तरह अब वक्त है कि नीतीश कुमार को अपने पुत्र,राजनीतिक दल व दल के नेताओं के भविष्य के लिए भाजपा पर भरोसा करना पड़ रहा है।लगता है कि मोदी और शाह ने नीतीश कुमार को आश्वस्त कर दिया है आपके सीएम नहीं रहने पर भी बिहार में आपका,आपके पुत्र और आपके दल के नेताओं का पूरा ख्याल रखा जाएगा। नीतीश कुमार खुद ही इसके लिए इसलिए भी तैयार हो गए होंगे कि उनकी शारीरिक व मानसिक सेहत भी ऐसी नहीं है कि वह किसी बड़े पद पर रहें।

बिहार मे नीतीश कुमार के सामने दो ही विकल्प थे। एक भविष्य की राजनीति के लिए भाजपा पर भरोसा करना या लालू यादव के परिवार के भरोसा करना। लालू परिवार को वह देख चुके हैं कि कैसे उसने उनकी पार्टी को ही अपनी पार्टी में मिलाने की साजिश की थी। यानी बिहार की राजनीति में से नीतीश परिवार की राजनीति का सफाया करने का प्रयास किया था।इसलिए नीतीश कुमार लालू यादव परिवार पर तो भरोसा कर नहीं सकते थे.ऐसे में उनके सामने यही विकल्प बचता था कि भाजपा पर ही भरोसा किया जाए और उन्होंने यही किया है।अब आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण बनेंगे और सत्ता की लड़ाई अब दो के बीच होगी और किसी एक को ही बहुमत मिलेगा। महाराष्ट्र के बाद बिहार में भाजपा की यह बड़ी राजनीतिक सफलता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *