रेल मंत्री वैष्णव ने रेल टेक पॉलिसी और एआई आधारित ई-आरसीटी की शुरुआत की

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में दो बड़े सुधारों की घोषणा की। इनमें रेल टेक पॉलिसी के तहत समर्पित रेल टेक पोर्टल का शुभारंभ और पूर्णतः एआई आधारित डिजिटल रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल (आरसीटी) प्रणाली की शुरुआत शामिल है।
वैष्णव ने यहां रेल भवन में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि रेल टेक पॉलिसी का उद्देश्य स्टार्टअप्स, नवोन्मेषकों, उद्योगों और शोध संस्थानों को रेलवे से एक व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से जोड़ना है। उन्होंने कहा, “स्टार्टअप्स और शोधकर्ता रेलवे से सीधे जुड़ सकें, इसी लक्ष्य के साथ यह नीति शुरू की गई है। कोई बाधा नहीं होगी, पूरी प्रक्रिया एंड-टू-एंड डिजिटल होगी और आज से रेल टेक पोर्टल शुरू किया जा रहा है। हमारा पूरा फोकस नई तकनीकों को आजमाने पर है।”
उन्होंने देशभर के स्टार्टअप्स और तकनीकी समाधान विकसित करने वाले नवप्रवर्तकों से अपील करते हुए कहा कि वे रेल टेक पोर्टल से जुड़ें। यह पोर्टल समस्याओं के डिजिटल समाधान स्वीकार करने का मंच होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि जब विज्ञान और नवाचार बड़े पैमाने से जुड़ते हैं और तकनीक परिवर्तन को गति देती है, तब बड़ी उपलब्धियों की नींव रखी जाती है।
रेल टेक पॉलिसी के तहत प्रस्तावों की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अब नवोन्मेषक एक ही चरण में विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकेंगे। प्रोटोटाइप विकास और परीक्षण के लिए अधिकतम अनुदान राशि को दोगुना कर दिया गया है, जबकि स्केल-अप अनुदान को तीन गुना से अधिक बढ़ाया गया है। यह प्रक्रिया उपयोगकर्ता अनुकूल होगी, जिससे व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
वैष्णव ने बताया कि इस नीति को तैयार करते समय रक्षा, धातुकर्म, दूरसंचार और जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों की स्टार्टअप नीतियों का अध्ययन किया गया। रक्षा क्षेत्र की आईडेक्स जैसी पहलों और अन्य क्षेत्रों की सफल नीतियों से सीख लेकर रेलवे ने एक सरल और बाधारहित नीति तैयार की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 के लिए 52 सप्ताह में 52 सुधारों का संकल्प लिया गया है।
प्रारंभिक तकनीकी चुनौतियों में एआई आधारित एलिफेंट इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (ईआईडीएस), कोचों में एआई आधारित अग्नि पहचान प्रणाली, ड्रोन आधारित टूटी रेल की पहचान, रेल तनाव निगरानी प्रणाली, पार्सल वैन में सेंसर आधारित लोड गणना उपकरण, कोचों पर सौर पैनल स्थापना तथा कोहरे के दौरान अवरोध पहचान प्रणाली शामिल हैं। कुछ स्टार्टअप्स कोचों में विद्युत तारों की निगरानी और करंट पैरामीटर के विश्लेषण पर भी कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा एआई आधारित पेंशन और विवाद निस्तारण प्रणाली पर भी काम किया जा रहा है।
दूसरे प्रमुख सुधार के रूप में मंत्री ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल (आरसीटी) को पूर्णतः डिजिटल और एआई सक्षम बनाने की घोषणा की। इसे नागरिक-केंद्रित पहल बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे दावों के निपटान की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी होगी। देशभर की 23 आरसीटी पीठों को डिजिटल रूप से जोड़ा जाएगा।
नई ‘ई-आरसीटी’ प्रणाली के तहत 24×7 ई-फाइलिंग की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे देश के किसी भी हिस्से से ऑनलाइन दावा दायर किया जा सकेगा। इसमें केस इन्फॉर्मेशन सिस्टम (सीआईएस), डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (डीएमएस) और स्वचालित अलर्ट जैसी सुविधाएं होंगी। आवेदकों को उनके मामलों की प्रगति की वास्तविक समय में जानकारी मिलेगी तथा सभी आदेश और दस्तावेज सुरक्षित डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेंगे।
मंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग से मामलों के निस्तारण में लगने वाला समय कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे पीड़ितों, उनके परिवारों, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों को त्वरित एवं विश्वसनीय न्यायिक प्रक्रिया का लाभ मिलेगा।

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