सूरत में साइबर रैकेट का पर्दाफाश, 800 करोड़ से अधिक का ट्रांजेक्शन, आठ गिरफ्तार

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सूरत/पाटण{ गहरी खोज }: सूरत के कतारगाम इलाके में साइबर क्राइम सेल ने बड़े ऑनलाइन बेटिंग रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में फरार आरोपित करण उर्फ द्वारकेश पीराभाई देसाई को पाटण जिले के वागडोद गांव से गिरफ्तार किया गया। आरोपित ने एमएससी आईटी की पढ़ाई कर रखी है।
जांच के दौरान पुलिस को लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई बैंक चेकबुक बरामद हुए हैं। जांच में सामने आया कि 149 अलग-अलग बैंक खातों के जरिए ₹8,00,66,51,326 (करीब 800 करोड़ रुपये) का ट्रांजेक्शन किया गया। इन खातों के खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल पर देशभर से 402 शिकायतें दर्ज हैं।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह पूरा रैकेट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित हो रहा था, जिसके तार बैंकॉक और वियतनाम तक जुड़े हैं। मुख्य सरगना जतीन उर्फ जॉन रेपर ठक्कर 2डी, बीआईजी आईडीइए, ओपीएस, डीएएफए और पारिमैच जैसी 50 से अधिक ऑनलाइन बेटिंग साइट्स संचालित करता था और अवैध फंड ट्रांसफर के लिए विशेष प्लेटफॉर्म तैयार किया गया था।
सूरत डीसीपी साइबर क्राइम बिशाखा जैन के अनुसार, आरोपी करण देसाई ने ‘लियोपेय 155’ नाम की फ्रेंचाइजी हासिल की थी। इसके जरिए वह ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग से जुड़े पैसों को म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर करता था। बाद में उसने यह काम अपने सह-आरोपी मीत शाह को सौंप दिया, जो फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया को अंजाम देता था।
इस मामले में अब तक कुल 8 आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें मुख्य सरगना जतीन ठक्कर के अलावा मीत शाह, यश शिंदे, ऋषिकेश सपकाळ, निलेश सोलंकी, परेश कुमार मोदी और दीपक कुमार ठक्कर शामिल हैं। ये सभी सूरत, अहमदाबाद, पाटण और महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों के निवासी हैं और रैकेट में अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे थे।
पाटण से पकड़े गए करण देसाई को सूरत लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 5 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि 800 करोड़ रुपये की रकम कहां ट्रांसफर की गई और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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