हर बड़ी रिलीज़ के साथ ‘साउथ बनाम बॉलीवुड’ की बहस फिर छिड़ जाती है। लेकिन इंडस्ट्री के भीतर तस्वीर इतनी सरल नहीं है — पैन-इंडिया रिलीज़ का फ़ॉर्मूला अब दोनों तरफ़ अपनाया जा रहा है।
क्या बदला है
- एक साथ कई भाषाओं में डबिंग और रिलीज़ अब सामान्य प्रचलन
- क्षेत्रीय सितारों की राष्ट्रीय पहचान बनी
- मार्केटिंग बजट में उत्तर और दक्षिण — दोनों बाज़ारों की हिस्सेदारी
असली कसौटी कंटेंट
ट्रेड विश्लेषकों का कहना है कि भव्य पैमाने और स्टारकास्ट से शुरुआती ओपनिंग तो मिल जाती है, लेकिन फ़िल्म का लंबा चलना पूरी तरह कहानी की पकड़ पर निर्भर करता है। हाल के कई उदाहरण इसकी पुष्टि करते हैं।
निर्माताओं का मानना है कि भाषा की दीवार अब पहले जैसी नहीं रही और दर्शक अच्छी कहानी को कहीं से भी अपना लेते हैं।
