भारतीय क्रिकेट का आगामी कैलेंडर बेहद व्यस्त है। एक ओर घरेलू सत्र के मुक़ाबले हैं, दूसरी ओर एशियाई खेल और इंडिया ए का विदेशी दौरा। ऐसे में खिलाड़ियों की उपलब्धता और वर्कलोड प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
तीन मोर्चों पर तैयारी
- घरेलू लंबे प्रारूप की प्रतियोगिताओं में मुख्य खिलाड़ियों की भागीदारी
- एशियाई खेलों के लिए अलग टी20 टीम
- इंडिया ए के ज़रिए विदेशी परिस्थितियों में तैयारी
वर्कलोड का गणित
तेज़ गेंदबाज़ों के लिए लगातार मैच खेलना चोट का जोखिम बढ़ाता है। सहयोगी स्टाफ़ रोटेशन नीति पर काम कर रहा है ताकि प्रमुख खिलाड़ी बड़े मुक़ाबलों के लिए तरोताज़ा रहें।
विशेषज्ञों का मानना है कि गहराई वाले खिलाड़ी-पूल के कारण भारत के पास विकल्प तो हैं, लेकिन तालमेल बनाए रखना प्रबंधन की परीक्षा होगी।