15 साल से अटकी पश्चिम रेलवे की गेज परिवर्तन परियोजना, 2025 तक प्रगति 0%
मंजूरी 2011 में, काम अब तक शुरू नहीं—पश्चिम रेलवे की लेटलतीफी पर सवाल
मुंबई की गोरेगांव–बोरीवली 7.08 किमी हार्बर लाइन भी अटकी, 2019 में मंजूरी के बाद भी काम 0 प्रतिशत
STORY BY NARENDRA GUPTA
मुंबई। पश्चिम रेलवे में वर्षों पहले मंजूर की गई कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाएं आज भी जमीन अधिग्रहण, वन एवं वन्यजीव मंजूरियों, विस्तृत अनुमान और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच अटकी हुई हैं। कई परियोजनाओं की भौतिक प्रगति अब भी शून्य है, जबकि कुछ को मंजूरी मिले एक दशक से भी अधिक समय बीत चुका है। यह चौंकाने वाली जानकारी सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जवाब से सामने आई है।
पश्चिम रेलवे से पिछले 10 वर्षों में लंबे समय से अधूरी पड़ी निर्माण परियोजनाओं की जानकारी मांगी गई थी। पश्चिम रेलवे के अधिकारी यशपाल कुमार, उप मुख्य अभियंता (योजना), ने 1 अक्टूबर 2025 को आरटीआई के जवाब में लंबित परियोजनाओं की विस्तृत सूची उपलब्ध कराई।
रेलवे के इस जवाब में सामने आया कि कई परियोजनाएं वर्षों पहले स्वीकृत होने के बावजूद अब तक शुरू ही नहीं हो सकीं, जबकि कुछ परियोजनाओं के लिए अभी तक ठेकेदार तक नियुक्त नहीं किया गया है। कहीं भूमि अधिग्रहण अटका है, तो कहीं विस्तृत अनुमान और आवश्यक वन एवं वन्यजीव मंजूरियां अब भी लंबित हैं।
2017 में स्वीकृत, लेकिन कई परियोजनाओं पर काम शुरू तक नहीं हुआ
रेलवे के रिकॉर्ड के अनुसार जम्बूसर–विश्वामित्री (48.2 किमी) परियोजना को अप्रैल 2017 में स्वीकृत किया गया था, लेकिन जवाब के समय तक काम शुरू नहीं हुआ था और भौतिक प्रगति 0 प्रतिशत थी। रेलवे ने इसका कारण विस्तृत अनुमान का स्वीकृत नहीं होना बताया है। परियोजना की लक्ष्य तिथि भी तय नहीं की गई है।
इसी तरह जूनागढ़–विसावदर (42.28 किमी) परियोजना भी अप्रैल 2017 में स्वीकृत हुई, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ और प्रगति 0 प्रतिशत रही। रेलवे ने भूमि अधिग्रहण में देरी तथा वन विभाग से वन्यजीव मंजूरी प्रमाणपत्र की आवश्यकता को देरी का कारण बताया है।
प्राची रोड–कोडिनार (26 किमी) और तलाला–देलवाड़ा (70 किमी) परियोजनाओं में भी काम शुरू नहीं हुआ और भौतिक प्रगति 0 प्रतिशत बताई गई है। दोनों मामलों में विस्तृत अनुमान के स्वीकृत न होने की बात कही गई है। रेलवे के अनुसार इन परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट रेलवे बोर्ड के विचाराधीन हैं और वन मंजूरी के लिए आवेदन किए गए हैं।
वेरावल–तलाला–विसावदर परियोजना भी अटकी
वेरावल–तलाला–विसावदर (71.95 किमी) परियोजना भी अप्रैल 2017 में स्वीकृत हुई थी। रेलवे के जवाब में इसकी भौतिक प्रगति 0 प्रतिशत और व्यय ₹0.00 दर्शाया गया है।
रेलवे ने बताया कि वेरावल–तलाला के 24.68 किमी हिस्से की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर रेलवे बोर्ड को भेजने की प्रक्रिया में है, जबकि तलाला–विसावदर के 47.27 किमी हिस्से को आवश्यक मंजूरियों और स्वीकृतियों के बाद ही आगे बढ़ाया जाएगा।
2011 में स्वीकृत हुए हिस्से भी अब तक शुरू नहीं
सबसे गंभीर सवाल शाहपुर–सराडिया (36.91 किमी) और सोमनाथ–कोडिनार से जुड़े हिस्सों को लेकर उठता है। रेलवे के अनुसार दोनों की स्वीकृति तिथि अप्रैल 2011 है।
शाहपुर–सराडिया में अब तक काम शुरू नहीं हुआ और भौतिक प्रगति 0 प्रतिशत बताई गई है। रेलवे ने विस्तृत अनुमान के स्वीकृत न होने की बात कही है और बताया कि परियोजना को पुनः शुरू करने का औचित्य रेलवे बोर्ड को भेजा गया है।
वहीं सोमनाथ–कोडिनार में भी काम शुरू नहीं हुआ। रेलवे ने देरी का कारण राज्य सरकार की ओर से भूमि अधिग्रहण में देरी बताया है। जवाब के अनुसार स्थानीय लोगों के विरोध के कारण भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रभावित हुई है और रेलवे ने राज्य सरकार से समस्या का समाधान करने का अनुरोध किया है।
मुंबई की गोरेगांव–बोरीवली हार्बर लाइन भी भूमि अधिग्रहण में अटकी
आरटीआई जवाब में मुंबई की गोरेगांव–बोरीवली हार्बर लाइन विस्तार (7.08 किमी) परियोजना भी शामिल है। यह परियोजना अप्रैल 2019 में स्वीकृत हुई थी, लेकिन जवाब के समय तक काम शुरू नहीं हुआ था।
रेलवे के अनुसार:
- भौतिक प्रगति: 0 प्रतिशत
- व्यय: ₹0.00
- काम: शुरू नहीं हुआ
- ठेकेदार: काम आवंटित नहीं हुआ
- लक्ष्य तिथि: तय नहीं
रेलवे ने इसके पीछे भूमि अधिग्रहण को मुख्य कारण बताया है। साथ ही गोरेगांव–बोरीवली के बीच 520 परियोजना प्रभावित व्यक्तियों (पीएपी) को परियोजना से प्रभावित 520 लोगों/परिवारों को उनके वर्तमान स्थान से हटाकर दूसरी जगह पुनर्वासित करने की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी दी है।
वर्षों से लंबित परियोजनाएं सवालों के घेरे में
पश्चिम रेलवे की कई परियोजनाएं मंजूरी के वर्षों बाद भी शुरू नहीं हो सकीं।
कुछ परियोजनाओं की भौतिक प्रगति वर्ष 2025 तक 0 प्रतिशत दर्ज है।
रेलवे ने देरी के लिए भूमि अधिग्रहण, वन एवं वन्यजीव मंजूरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को कारण बताया है।
लेकिन सवाल यह है कि वर्षों की देरी के बावजूद जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई?
कितनी राशि स्वीकृत, जारी और खर्च हुई, इसका पूरा विवरण भी जवाब में स्पष्ट नहीं है।
अब इन परियोजनाओं की लागत, देरी और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्रोत: 01/10/2025 को प्राप्त आरटीआई जवाब के अनुसार उस समय की परियोजना स्थिति दी गई है; इसके बाद कार्य की प्रगति में बदलाव संभव है।
