उकाई परियोजना: दक्षिण गुजरात की खेती, बिजली और पानी की सबसे बड़ी ताकत

0
WhatsApp Image 2026-08-10 at 09.33.10 (3)

गांधीनगर, 10 अगस्त। गुजरात की स्थापना से पहले वर्ष 1949 में शुरू हुई उकाई-काकरापार बहुउद्देशीय योजना आज दक्षिण गुजरात की जल व्यवस्था की अहम आधारशिला बन चुकी है। तापी नदी पर बनी यह परियोजना सिंचाई के साथ बिजली उत्पादन, पेयजल, औद्योगिक जलापूर्ति और बाढ़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

7,497 मिलियन घन मीटर पानी की क्षमता

करीब 600 वर्ग किलोमीटर में फैले उकाई जलाशय की कुल संग्रहण क्षमता 7,497 मिलियन घन मीटर और जीवंत संग्रहण क्षमता 6,615 मिलियन घन मीटर है। वर्ष 1972 में बाँध का निर्माण पूरा हुआ और 1973 में पहली बार जलाशय में पानी भरा गया।

इस योजना से 3,31,557 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लाभ मिलता है। भरूच, सूरत, नवसारी, तापी और वलसाड जिलों की कृषि को इसका सीधा फायदा मिलता है। विभिन्न उद्वहन सिंचाई योजनाओं के माध्यम से तापी, सूरत और नर्मदा जिलों के 298 गांवों तक भी पानी पहुँचाया जाता है।

गुजरात की ऊर्जा व्यवस्था के लिए भी अहम

उकाई जलाशय से बिजली उत्पादन के लिए भी पानी उपलब्ध कराया जाता है। इसमें उकाई थर्मल पावर प्लांट की 1,110 मेगावाट, हाइड्रो पावर प्लांट की 305 मेगावाट और काकरापार परमाणु संयंत्र की 1,840 मेगावाट क्षमता वाली इकाइयाँ शामिल हैं।

इसके अलावा सूरत, भरूच, नवसारी और वलसाड जिलों के शहरों को पेयजल तथा जीआईडीसी, जे.के. पेपर मिल और शुगर फैक्ट्रियों जैसी औद्योगिक इकाइयों को भी पानी उपलब्ध कराया जाता है।

तापी नदी से जुड़ी विशाल जल परियोजना

मध्य प्रदेश के मुलताई से निकलने वाली 724 किलोमीटर लंबी तापी नदी का 214 किलोमीटर हिस्सा गुजरात में है। उकाई जलाशय का जलग्रहण क्षेत्र लगभग 62,225 वर्ग किलोमीटर है। पूर्ण जल स्तर पर जलाशय की परिधि करीब 525 किलोमीटर है।

उकाई-काकरापार योजना आज दक्षिण गुजरात में सिंचाई, पेयजल, बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण का प्रमुख आधार बनकर क्षेत्र के कृषि एवं औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *