तरुण चुघ का राज्यसभा नामांकन

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tarun-chugh
  • इरविन खन्ना
    संपादकीय { गहरी खोज }:
    भारतीय जनता पार्टी के महामंत्री तरुण चुघ को राज्यसभा में भेजने का फैसला भाजपा के कार्यकर्ताओं विशेषतया पंजाब के कार्यकर्ताओं के दिलों में उत्साह भरने वाला फैसला है। भाजपा नेतृत्व ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को मद्देनजर रखते हुए जहां पंजाब भाजपा की कमान केवल सिंह ढिल्लों को दी है वहीं तरुण चुघ को राज्यसभा में भेजना और रवनीत बिट्टू को पंजाब की राजनीति में सक्रिय करना दर्शाता है कि भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व पंजाब की राजनीति के साथ-साथ पंजाब में भाजपा कार्यकर्ताओं की भावनाओं को भी समझ रहा है।

2020-21 के किसान आंदोलन के बाद पंजाब भाजपा में जिस तरह से अन्य दलों के नेताओं के लिए दरवाजे खुले थे, और उनको पार्टी में बड़ी जिम्मेवारियां दी गई विशेषतया रवनीत बिट्टू और सुनील जाखड़ को तो इसके साथ ही पंजाब भाजपा के जो टकसाली नेता या कार्यकर्ता थे वह उदासीन हो गए थे। उनको अपने घर में आये नये चेहरे हावी होते दिखाई दे रहे थे। ऐसी स्थिति में भी इन टकसाली नेताओं और कार्यकर्ताओं का पार्टी प्रति ईमानदार रहना और चुप रहना दर्शाता है कि उनके दिलो-दिमाग में पार्टी व राष्ट्र के प्रति जो धारणाएं समय के साथ-साथ मजबूत होती गई, वह क्षणिक राजनीतिक लाभ-हानि से कमजोर होने वाली नहीं। लेकिन भाजपा नेताओं ने अपना रोष दबे लफ्जों में भाजपा हाईकमान को अवश्य प्रकट किया और भाजपा हाईकमान ने भाजपा के टकसाली नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए ही तरुण चुघ को राज्यसभा में भेजने का निर्णय लिया है।

तरुण चुघ के नामांकन पर आई प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है, कि राष्ट्र स्तर पर भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस निर्णय का स्वागत किया और सराहा है। उनका कहना है कि तरुण चुघ की नियुक्ति यह संदेश देती है कि भाजपा में संगठन के प्रति समर्पण, परिश्रम और निरंतर सक्रियता को महत्व दिया जाता है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि राज्यसभा में पहुंचने के बाद तरुण चुघ पंजाब से जुड़े विकास, सुरक्षा, सीमा क्षेत्र, उद्योग और युवाओं के मुद्दों को प्रमुखता से उठा सकते हैं। पार्टी नेतृत्व को विश्वास है कि उनका व्यापक संगठनात्मक अनुभव संसद में भी प्रभावी भूमिका निभाने में सहायक होगा। इसे संगठन के उस कार्यकर्ता-केन्द्रित दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति के रूप में भी देखा जा रहा है, जिसने उन्हें बूथ स्तर से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंचाया। भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ बाल्यकाल से स्वयंसेवक हैं और इनका परिवार पिछली तीन पीढियों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा परिवार है, 1987 में विद्यार्थी परिषद से जुड़े, 1989 में बूथ इंचार्ज बने, 1993 में जिले की युवा मोर्चा इकाई के अध्यक्ष बने थे। 1997 में पंजाब भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष का दायित्व निभाया, 2003 में जिला भाजपा उपाध्यक्ष, 2008 में प्रदेश भाजपा सचिव, 2012 में प्रदेश महामंत्री, और 2014 में दिल्ली का सफ़र पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री तौर पर और 2020 में राष्ट्रीय महामंत्री और अब 2026 में पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री सहित राज्यसभा का सफर तय किया तरुण चुघ ने। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृहमंत्री अमित शाह के समर्थन और संरक्षण के कारण तरुण चुघ पंजाब की राजनीति में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में रहेंगे। प्रदेश भाजपा और राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच भी एक सेतू की भूमिका तरुण चुघ की रहेगी। पंजाब भाजपा का टकसाली कार्यकर्ता जो बात प्रदेश अध्यक्ष केवल ढिल्लों से करने में झिझक महसूस करता है वह अब अपनी बात तरुण चुघ के साथ खुलकर करने की स्थिति में है। तरुण चुघ के राज्यसभा नामांकन के साथ ही पंजाब में भाजपा के दो मुख्य चेहरे सामने आ गये हैं। केवल ढिल्लों और तरुण चुघ, ग्रमीण और शहरी के साथ-साथ हिन्दू और सिख तथा नये व पुराने कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन बनाने का भी यह एक प्रयास है। पंजाब में भाजपा का भविष्य ढिल्लों और चुघ के आपसी तालमेल और प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ संबंधों पर ही निर्भर रहेगा।

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