अनूपपुर में हाथियों का आतंक जारी, हमले में अब तक सात मवेशियों की हो चुकी मौत

0
bcd7a685058e0fe1b3bf162c8eb1d91d

अनूपपुर{ गहरी खोज }: मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार और सोमवार की दरमियानी रात एक बार फिर हाथी ने गांव में घुसकर एक पालतू बछिया को मार डाला। बीते करीब एक माह में हाथियों के हमलों में अब तक सात मवेशियों की मौत हो चुकी है, जबकि कई ग्रामीणों के मकानों और झोपड़ियों को नुकसान पहुंचा है।
जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ सीमा से आया एक दंतैल नर हाथी पिछले लगभग एक माह से जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में विचरण कर रहा है। रविवार रात हाथी ने जिला मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत खांड़ा में बोधन सिंह के खेत में चर रही बछिया पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथी कई बार गांव में घुसकर फसलों, कटहल और बांस के पेड़ों को नुकसान पहुंचा चुका है। इसके साथ ही दो झोपड़ियों को भी तोड़ दिया गया। ग्रामीण मोहन सिंह उर्फ ललऊ के कच्चे मकान में हाथी सातवीं बार घुसा और पूरे घर को तहस-नहस कर दिया। गौशाला में भी तोड़फोड़ की गई तथा कुएं के ऊपर रखी लकड़ियों को अंदर धकेल दिया गया।
लगातार हो रहे हमलों के कारण मोहन सिंह अपने परिवार के साथ गांव छोड़कर रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हाथी को भगाने की कोशिश करने पर वह आक्रामक हो जाता है और लोगों पर हमला करने के लिए दौड़ता है। बताया गया कि तीन दिन पहले भी हाथी ने सोनमौहरी और सेंदुरी गांवों में छह पालतू मवेशियों को मार डाला था। इसके अलावा कई ग्रामीणों के घरों में तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचाया गया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जिले के प्रभारी मंत्री पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि हाथियों की निगरानी के लिए लगाए गए कर्मचारियों द्वारा जिम्मेदारीपूर्वक कार्य नहीं किया जा रहा है। इधर, हाल ही में रामलाल रौतेल ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हाथियों की समस्या से अवगत कराया था और जल्द समाधान की मांग की थी। वन विभाग के अनुसार तीन हाथियों का एक समूह जैतहरी क्षेत्र के धनगवां और आमापानी के जंगलों में डेरा डाले हुए है, जबकि एक बड़ा हाथी वापस छत्तीसगढ़ के मरवाही क्षेत्र की ओर लौट गया है। शासन स्तर पर हाथियों को जिले से बाहर करने अथवा रेस्क्यू की कार्रवाई को लेकर पत्राचार किया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *