नीट अभ्यर्थियों से एमबीबीएस दाखिले के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा, डॉक्टर समेत चार गिरफ्तार

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नीट अभ्यर्थियों को एमबीबीएस में दाखिला दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में डॉक्टर समेत चार आरोपिताें को गिरफ्तार किया है। आरोपिताें के कब्जे से 18 छात्रों को मुक्त कराया गया, जिनमें कई नाबालिग भी शामिल हैं।
क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त संजीव यादव ने साेमवार काे बताया कि आरोपित छात्रों और उनके अभिभावकों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने का भरोसा देकर 20 से 30 लाख रुपये तक की मांग करते थे। इसके बदले वे नकद राशि, 10वीं-12वीं की मूल मार्कशीट और खाली हस्ताक्षरित चेक ले लेते थे। मामले का खुलासा गुजरात पुलिस से मिली सूचना के बाद हुआ। सूचना थी कि एक व्यक्ति दिल्ली में रहकर नीट-यूजी 2026 के जरिए मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराने का दावा कर रहा है। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने महिपालपुर क्षेत्र के करीब 100 होटलों में तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान गुजरात से आए कुछ लोग एक होटल में मिले। पूछताछ में उन्होंने बताया कि आरोपिताें ने उनके बच्चों का एमबीबीएस में दाखिला कराने का भरोसा देकर उनसे पैसे और दस्तावेज लिए हैं।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि छात्रों को “महत्वपूर्ण प्रश्नपत्र” देने के बहाने अभिभावकों से अलग कर एक स्थान पर रखा गया है। इसके बाद पुलिस ने गाजियाबाद के मणिपाल अस्पताल के पास जाल बिछाकर मास्टरमाइंड संतोष कुमार जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया और तीन छात्रों को छुड़ाया। आगे की कार्रवाई में गाजियाबाद के एक फ्लैट पर छापा मारकर 15 और छात्रों को बरामद किया गया। इनमें कुछ छात्र अगले दिन होने वाली नीट परीक्षा में शामिल होने वाले थे। पुलिस ने उन्हें काउंसलिंग के बाद परीक्षा देने भेजा। गिरफ्तार आरोपिताें की पहचान संतोष कुमार जायसवाल, डॉ. अखलाक आलम उर्फ गोल्डन आलम, संत प्रताप सिंह और विनोद भाई पटेल के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से 149 पन्नों के फर्जी प्रश्नपत्र/स्टडी मटेरियल, पीड़ितों के साइन किए हुए तीन ब्लैंक चेक और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं।
पूछताछ में सामने आया कि संतोष जायसवाल इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड है। डॉ. अखलाक पुराने प्रश्नपत्रों और कोचिंग संस्थानों के प्रश्न बैंक से फर्जी पेपर तैयार करता था। संत प्रताप सिंह ने ठहरने और बैठकों के लिए फ्लैट उपलब्ध कराया था, जबकि विनोद पटेल गुजरात में अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें फंसाता था। क्राइम ब्रांच अब गिरोह के अन्य सदस्यों और बिचौलियों की तलाश में जुटी है। पुलिस ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि दाखिले के नाम पर किसी भी फर्जी दावे और शॉर्टकट के झांसे में न आएं।

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