भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच नेस्ले इंडिया का जोर बिक्री बढ़ाने पर
नयी दिल्ली{ गहरी खोज }: रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान (एफएमसीजी) बेचने वाली प्रमुख कंपनी नेस्ले के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मनीष तिवारी ने कहा कि कच्चे माल की लागत में तेजी और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर चिंताएं हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी नए वित्त वर्ष में मात्रा आधारित वृद्धि पर ध्यान बनाए हुए है। मैगी, नेस्कैफे और किटकैट जैसे उत्पाद बनाने वाली कंपनी ने सतर्क रुख अपनाते हुए कहा कि मौजूदा हालात में स्थिति का अनुमान लगाना कठिन है और वह देखो और इंतजार करो की नीति पर चल रही है।
तिवारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, “समय काफी अनिश्चित है। दो महीने बाद स्थिति क्या होगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है।” उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, मानसून को लेकर चिंता और जिंस कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण लागत पर दबाव बना हुआ है। हालांकि उन्होंने तत्काल कीमत बढ़ाने का कोई संकेत नहीं दिया।
तिवारी ने कहा कि कंपनी का अधिकांश उत्पादन देश में होता है और 97 प्रतिशत से अधिक कच्चा माल स्थानीय स्तर पर प्राप्त किया जाता है, फिर भी इससे महंगाई के असर से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “यह इस बात पर निर्भर करेगा कि पश्चिम एशिया में राजनीतिक स्थिति कैसे बदलती है। हमें इसके लिए तैयार रहना होगा।” उन्होंने बताया कि कंपनी लागत को नियंत्रित करने के लिए आंतरिक स्तर पर दक्षता बढ़ाने के उपाय भी कर रही है।
तिवारी ने कहा कि उतार-चढ़ाव के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के विभिन्न कारोबारों में मात्रा वृद्धि के कारण अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि कंपनी आगे भी मात्रा आधारित वृद्धि पर ध्यान देगी और बाजार में पहुंच बढ़ाने पर जोर बनाए रखेगी।
उन्होंने कहा कि कंपनी उपयुक्त अवसर मिलने पर अधिग्रहण के लिए भी तैयार है। वित्त वर्ष 2025-26 में नेस्ले इंडिया का कुल राजस्व 14.46 प्रतिशत बढ़कर 23,194.95 करोड़ रुपये रहा। चौथी तिमाही में कंपनी का लाभ 1,110.9 करोड़ रुपये रहा, जबकि उत्पाद बिक्री से आय 6,723.75 करोड़ रुपये दर्ज की गई।
