कांग्रेस शासन में भारत-दक्षिण कोरिया के बीच हुआ एफटीए ‘खराब बातचीत’ का नतीजा, देश का व्यापार घाटा बढ़ा : पीयूष गोयल

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस शासन में 2010 में लागू हुआ भारत-दक्षिण कोरिया एफटीए (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) खराब बातचीत का नतीजा था। इससे भारत के व्यापार घाटे में बढ़ोतरी हुई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर गोयल ने कहा,”कांग्रेस शासन में 2009 में भारत-दक्षिण कोरिया एफटीए हुआ था और 2010 में इसे लागू किया गया था। यह एक खराब बातचीत का नतीजा और इसमें व्यापार असंतुलन भारत की तरफ झुका हुआ था।”
पोस्ट में आगे गोयल ने कहा, “एफटीए के लागू होने के बाद से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 92.7 प्रतिशत बढ़ा है और भारत के आयात में 103.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है , जो साफ दिखाता है कि इससे भारत को फायदा नहीं हो रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने मुलाकात की और भारत-कोरिया सीईपीए (व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते) में संशोधन के लिए बातचीत शुरू करने पर सहमति व्यक्त की, जिसका उद्देश्य एक सहमत रोडमैप के माध्यम से व्यापार में गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों प्रकार की वृद्धि हासिल करना था।
इसके बाद, भारत-कोरिया व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (आईकेसीईपीए) के तहत संयुक्त समिति की मंत्रिस्तरीय बैठक में, मंत्रियों ने पुनर्विचार वार्ता शुरू करने की घोषणा की, जिसके तहत ग्यारह दौर आयोजित किए गए और एक अर्ली हार्वेस्ट पैकेज पर सहमति बनी। अब, निरंतर और समन्वित प्रयासों के माध्यम से, दोनों देशों ने पूर्व में सहमत पहलुओं से आगे बढ़कर अधिक पारस्परिक और पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है, जिसमें साझा हितों के प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, साथ ही गैर-टैरिफ बाधाओं और मूल नियमों को भी संबोधित किया जाएगा। पुनर्विचार वार्ता 2026 के अंत तक या अधिकतम 2027 के मध्य तक पूरी होने की उम्मीद है।
साथ ही, भारत में कार्यरत कोरियाई कंपनियों के स्थानीयकरण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों के परिणाम दिखने लगे हैं। उन्होंने बताया कि अब हम वास्तविक स्वदेशीकरण और बेहतर पारस्परिक सहयोग देख रहे हैं।

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