महाराष्ट्र में रिक्शा-टैक्सी चालकों पर मराठी अनिवार्य का निर्णय लादना अनुचित: संजय निरुपम

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मुंबई{ गहरी खोज }: शिवसेना शिंदे समूह के प्रवक्ता और पूर्व सांसद संजय निरुपम ने गुरुवार को कहा कि महाराष्ट्र में रिक्शा-टैक्सी चालकों पर मराठी अनिवार्य का निर्णय लादना अनुचित है। निरुपम ने कहा कि अगर राज्य सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो वे इस निर्णय का जोरदार विरोध करेंगे।
संजय निरुपम ने गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भाषाई अस्मिता के हिसाब से महाराष्ट्र में रहने वालों को मराठी भाषा आनी चाहिए। यह सही है। लेकिन यह निर्णय रोजी-रोटी कमाने वाले रिक्शा-टैक्सी चालकों पर लादना कहां तक उचित है। इस वर्ग को मराठी का ज्ञान यात्री की बात समझने तक ही सीमित है लेकिन राज्य सरकार ने राज्य में एक मई से सभी रिक्शा-टैक्सी चालकों को पढ़ने-लिखने तक की परीक्षा ले रही है। इससे बहुत से मेहनतकश वर्ग पर रोजी-रोटी का खतरा मंडराने लगा है। इससे पहले राज्य में रिक्शा-टैक्सी चालकों को सिर्फ मराठी समझने का ज्ञान होने के बाद उन्हें लाइसेंस जारी किया जाता रहा है लेकिन अब मराठी की परीक्षा ली जा रही है। इस तरह मराठी की अनिवार्यता के नाम पर मेहनतकश वर्ग की रोजी-रोटी छिनना ठीक नहीं है।
इसी मुद्दे पर भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने भी रिक्शा-टैक्सी चालकों के यूनियन के पदाधिकारियों से चर्चा की। इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता गुणरत्न सदावर्ते भी नरेंद्र मेहता से मिले। इस मुलाकात के बाद गुणरत्न सदावर्ते ने कहा कि वे राज्य सरकार का इस मुद्दे पर कड़ा विरोध व्यक्त करते हैं। सदावर्ते ने कहा कि अगर सरकार ने अपना निर्णय वापस नहीं लिया तो वे खुद रिक्शा-टैक्सी चालकों के साथ राज्य सरकार के विरुद्ध जोरदार आंदोलन करेंगे।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने एक मई से सभी रिक्शा-टैक्सी चालकों पर मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इसके फलस्वरुप महाराष्ट्र खासकर मुंबई ठाणे, पालघर, नवी मुंबई आदि शहरों में परिवहन अधिकारी रिक्शा-टैक्सी चालकों की मराठी भाषा की परीक्षा ले रहे हैं। इससे रिक्शा-टैक्सी चालकों में सरकार के प्रति असंतोष फैल रहा है।

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