नशे की सप्लाई चेन पर वार: शिमला पुलिस ने 3 महीने में 27 बड़े तस्कर दबोचे, 19 नेटवर्क ध्वस्त

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शिमला{ गहरी खोज }: शिमला में नशा तस्करी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई इस साल नई रणनीति और बड़े पैमाने पर असर दिखाती नजर आ रही है। अब सिर्फ छोटे पेडलरों तक सीमित रहने के बजाय पुलिस सीधे उन नेटवर्कों तक पहुंच रही है, जहां से नशे की सप्लाई शुरू होती है। इसी बदली हुई रणनीति के चलते शिमला पुलिस ने दावा किया है कि 2026 के पहले साढ़े तीन महीनों में ही 27 बड़े तस्करों और सप्लायरों को गिरफ्तार किया गया है, जो पिछले वर्षों के मुकाबले कहीं ज्यादा है।
पुलिस के मुताबिक यह सफलता बैकवर्ड लिंकिज पर काम करने की वजह से मिली है, यानी किसी एक मामले में पकड़े गए आरोपी से आगे बढ़ते हुए पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा जा रहा है। यही वजह है कि जहां 2024 में इसी अवधि में सिर्फ 4 और 2025 में 9 लोगों की इस आधार पर गिरफ्तारी हुई थी, वहीं 2026 में यह आंकड़ा सीधे 27 तक पहुंच गया।
कार्रवाई का दायरा भी इस बार काफी बड़ा रहा है। पुलिस के अनुसार, इस साल अब तक 19 ऐसे नेटवर्क तोड़े गए हैं, जो हिमाचल में नशे की सप्लाई कर रहे थे। ये नेटवर्क नेपाल के अलावा पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, केरल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से जुड़े थे और अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहे थे। तुलना करें तो 2025 में सिर्फ 4 और 2024 में महज 1 नेटवर्क पर ही कार्रवाई हुई थी।
जांच के दौरान कई बड़े और चौंकाने वाले मामले भी सामने आए हैं। एक मामले में करीब एक करोड़ रुपये कीमत की एलएसडी बरामद की गई और इस नेटवर्क से जुड़े सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें चार पुलिसकर्मी भी शामिल थे। वहीं अंबाला से चल रहे चिट्ठा तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ कर 288 ग्राम चिट्ठा पकड़ा गया, जिसे स्थानीय युवाओं में बेचा जाना था।
नेपाल से लाई जा रही करीब 11.5 किलो अफीम की खेप को भी पुलिस ने पकड़ा, जिसमें चार लोगों को गिरफ्तार किया गया और करीब 12 लाख रुपये नकद बरामद हुए। लंबे समय से फरार चल रहे शाही महात्मा गैंग के सरगना को भी गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा लुकस और डेविड जैसे वांछित आरोपियों को पंजाब और हरियाणा से पकड़ा गया, जबकि 83 ग्राम चिट्ठा तस्करी के एक अन्य मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया।
एसएसपी शिमला गौरव सिंह का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से नशे की सप्लाई चेन को तोड़ने में मदद मिली है और नेटवर्क कमजोर हुए हैं। इससे बड़ी संख्या में युवाओं तक नशा पहुंचने से रोका जा सका है। एसएसपी के मुताबिक यह रणनीति न केवल मौजूदा मामलों को नियंत्रित करने में कारगर है, बल्कि भविष्य में ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति रोकने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

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