महिला कांग्रेस ने आरक्षण और परिसीमन मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा

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जयपुर{ गहरी खोज }: अखिल भारतीय महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा ने कहा है कि संसद में 2023 में सर्वसम्मति से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) को लागू करने में सरकार ने अनावश्यक देरी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 30 महीने बाद 16 अप्रैल 2026 को इसका नोटिफिकेशन जारी किया गया।
अल्का लांबा ने कहा कि 16 से 18 अप्रैल 2026 के बीच बुलाए गए संसद के विशेष सत्र में सरकार ने परिसीमन संशोधन विधेयक पेश किया, जबकि विपक्ष की मांग थी कि पहले सर्वदलीय बैठक बुलाकर मसौदा साझा किया जाए। लांबा ने मंगलवार काे प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता काे संबाेधित करते हुए आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने विपक्ष की मांगों को नजरअंदाज किया और विशेष सत्र ऐसे समय बुलाया जब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के सांसद चुनावों में व्यस्त थे। महिला कांग्रेस ने मांग की कि वर्तमान लोकसभा की 543 सीटों में से 180 सीटों पर तुरंत महिला आरक्षण लागू किया जाए। साथ ही ओबीसी वर्ग की महिलाओं को भी आरक्षण में शामिल करने की मांग उठाई गई। प्रेसवार्ता में कहा गया कि सरकार बिना नई जनगणना के परिसीमन करना चाहती है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। कांग्रेस ने मांग की कि 2026-27 में प्रस्तावित जातिगत जनगणना के आधार पर ही परिसीमन किया जाए।
महिला कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय 73वें और 74वें संविधान संशोधन का हवाला देते हुए कहा कि पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को आरक्षण देकर राजनीतिक भागीदारी बढ़ाई गई थी, जिसका असर आज भी दिख रहा है। महिला कांग्रेस ने चेतावनी दी कि महिला आरक्षण लागू नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। पार्टी ने आगामी मानसून सत्र में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने की बात कही। महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच टकराव तेज होता जा रहा है, जिसका असर राज्यों में भी दिखाई दे रहा है।
उन्हाेंने कहा कि कांग्रेस की यूपीए सरकार ने 2010 में राज्यसभा में बहुमत होने पर महिला आरक्षण बिल पारित करवाया था। लोकसभा में कांग्रेस का बहुमत नहीं होने से यह बिल पारित नहीं हो सका, क्योंकि सहमति नहीं बन सकी और उक्त समय भाजपा के सांसदों ने भी इस कानून को लागू करने का विरोध किया था। भाजपा की केन्द्र सरकार ने कांग्रेस के दबाव में महिला आरक्षण कानून के लिये बिल 2023 में प्रस्तुत किया क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव होने थे। प्रधानमंत्री केवल राजनैतिक लाभ लेने के लिये कांग्रेस को कोस रहे हैं और यह काम 29 अप्रेल तक चलेगा, क्योंकि तब बंगाल और तमिलनाडू के चुनाव सम्पन्न होंगे। राष्ट्रीय ध्वज लगाकर देश के नाम सम्बोधन में केवल कांग्रेस एवं विपक्षी दलों को कोसने का काम ही प्रधानमंत्री करते हैं। यदि चुनावी सम्बोधन ही करना था तो भाजपा कार्यालय में जाकर मीडिया को बुलाकर प्रेसवार्ता करते।

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