वस्त्र मंत्रालय और फेमिना मिस इंडिया के बीच समझौते से भारतीय हथकरघा को मिलेगी वैश्विक पहचान

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: वस्त्र मंत्रालय के तहत हथकरघा विकास आयुक्त कार्यालय ने गुरुवार को ‘फेमिना मिस इंडिया’ के साथ सहयोग की घोषणा की। इस साझेदारी का उद्देश्य “विश्व सूत्र–भारत की बुनाई दुनिया के लिए” कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय हथकरघा की समृद्ध विरासत और विविधता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करना है।
मंत्रालय के अनुसार इस विशेष पहल के तहत फेमिना मिस इंडिया के ग्रैंड फिनाले में एक विशेष हथकरघा संग्रह का अनावरण किया जाएगा, जो भारतीय बुनकरों की कलात्मकता का जश्न होगा तथा हथकरघा क्षेत्र की स्थिरता और सांस्कृतिक गहराई के दर्शाएगा।
विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम बीना ने कहा कि इस सहयोग का उद्देश्य युवा वर्ग, फैशन जगत के हितधारकों और अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ताओं के बीच भारतीय हथकरघा की दृश्यता को बढ़ाना है। यह ‘हथकरघा विरासत के रूप में हथकरघा भविष्य के रूप में’ की धारणा को सुदृढ़ करता है और सरकार के ऑरेंज इकोनॉमी, सांस्कृतिक विरासत और रचनात्मक उद्यमिता को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
इसमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के विजेता भाग ले रहे हैं। ये विजेता अपने क्षेत्र की बुनाई परंपरा से प्रेरित हथकरघा परिधानों का प्रदर्शन करेंगे। वे चयनित देश की सांस्कृतिक सौंदर्यशास्त्र को प्रतिबिंबित करने के लिए रचनात्मक रूप से प्रस्तुत करेंगे। यह दृष्टिकोण प्रतीकात्मक रूप से भारत की वस्त्र विरासत को वैश्विक फैशन की कहानियों से जोड़ता है।
पहनावा भारत की प्रतिष्ठित बुनाई से प्रेरणा लेता है, जिसमें वाराणसी ब्रोकेड, लेप्चा, कांचीपुरम, कोटा डोरिया, माहेश्वरी, पटोला, इकत, कसावु, पैठानी, फुलकारी, जामदानी, कुल्लू शॉल, उप्पादा, खुन्न, पश्मीना, मुगा सिल्क, इलकल और अन्य प्रतिष्ठित क्षेत्रीय परंपराएं शामिल हैं।
यह पहल प्रधानमंत्री के 5एफ विज़न (फार्म टू फाइबर टू फैक्टरी टू फैशन टू फॉरेन) और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को सशक्त बनाती है। इस पहल के माध्यम से सांस्कृतिक उद्योगों को मजबूती मिलेगी, रोजगार का सृजन होगा और विदेशी बाजारों में भारत की उपस्थिति का विस्तार होगा।

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