पंजाब भाजपा कार्यालय पर हमला

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  • इरविन खन्ना
    संपादकीय { गहरी खोज }:
    चंडीगढ़ के सैक्टर 37 में स्थित पंजाब भाजपा के कार्यालय पर हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर पंजाबियों को चिंता में डाल दिया है। आतंकी हमले से पहले पंजाब के होशियारपुर में बेअदबी की घटना और अमृतसर में पुलिस चौकी पर हमला दर्शाता है कि विदेशों में बैठी प्रदेश व देश विरोधी ताकतें अपने मोहरों के माध्यम से पंजाब की शांति को भंग करने का लगातार प्रयास कर रही हैं। गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने पिछले लम्बे समय से नशों विरुद्ध और गैंगस्टरों विरुद्ध अभियान चलाया हुआ है।

इसके बावजूद चंडीगढ़ और पंजाब दोनों में स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियां, नशे की तस्करी की घटनाओं को लेकर समाचार मिल रहे हैं। विदेशों में बैठे अलगाववादी जिन्हें भारत विरोधी ताकतें नहीं चाहती कि पंजाब में शांति व्यवस्था बनी रहे उनका मकसद 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को मद्देनजर रखते हुए पंजाब का माहौल खराब कर राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करना हो सकता है।

भाजपा का दावा है कि पंजाब प्रदेश के संगठन मंत्री श्री निवासुलू और कार्यकारी प्रधान अश्विनी शर्मा सहित भाजपा के कई नेताओं को पाकिस्तान के नंबरों से धमकियां पहले भी मिलती रही हैं जिसकी सूचना पुलिस को दी जाती रही है। भाजपा के कार्यालय पर दिन दिहाड़े हुआ हमला चंडीगढ़ पुलिस की कार्य प्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लगाने वाला है। चंडीगढ़ में बढ़ रही गैंगस्टर संस्कृति भी चिंता का विषय है। चंडीगढ़ केन्द्र शासित है और पंजाब व हरियाणा की राजधानी भी है इसलिए यह आतंकी घटनाएं पूरे क्षेत्र में दहशत फैला देती हैं। पंजाब भाजपा कार्यालय पर हुए हमले की जिम्मेदारी खालिस्तानियों ने ली है। हमला करने वालों ने हमले की वीडियो भी बनाई और निकल भी गए। पंजाब में 2027 के शुरू में होने वाले चुनावों से पहले बेअदबी की घटनाएं और आतंकी हमले व गैंगस्टरों की आपसी लड़ाई की घटनाएं बढ़ सकती हैं क्योंकि विदेशों में बैठे प्रदेश विरोधी लोगों का लक्ष्य मान सरकार की छवि व साख को कमजोर करना ही है।

अतीत में जाएं तो पाएंगे कि विधानसभा चुनावों से पहले ऐसी घटनाओं के कारण ही सत्तारूढ़ दल व सरकार की छवि खराब हुई और वह सत्ता से बाहर हो गए। सत्ता से बाहर होने के कई और कारण भी थे लेकिन हिंसात्मक घटनाओं ने अग्नि में घी डालने का कार्य किया ।

वर्तमान में हो रही हिंसात्मक घटनाओं को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। क्योंकि अलगाववादियों और आतंकियों का इरादा पंजाब में अराजकता का माहौल पैदा कर सरकार के लिए कठिनाइयां पैदा करना है। हिंसात्मक घटनाएं चाहे वह चंडीगढ़ में हो या पंजाब में उसका तत्काल प्रभाव पंजाब के सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक माहौल पर पड़ता है। पंजाब सरकार को उपरोक्त घटना को चंडीगढ़ की घटना कहकर इसकी अनदेखी करने के बजाए गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि इन घटनाओं का सबसे अधिक प्रभाव आम आदमी पार्टी और मान सरकार पर ही पड़ेगा।

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