आस्था से अर्थव्यवस्था’ की उड़ान: बौद्ध सर्किट से आध्यात्मिक राजधानी बनने की राह पर यूपी

0
1610dbc583a273287cd375501ebf1b68

लखनऊ{ गहरी खोज }: उत्तर प्रदेश को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने के लक्ष्य को अब ठोस आधार मिलता दिख रहा है। सारनाथ से कुशीनगर और श्रावस्ती से कपिलवस्तु तक फैला बौद्ध सर्किट न सिर्फ आस्था का केंद्र बन रहा है, बल्कि यह वैश्विक पर्यटन, निवेश और सांस्कृतिक कूटनीति का मजबूत स्तंभ भी बनकर उभर रहा है।
हाल ही में कुशीनगर में आयोजित इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव-2026 ने इस दिशा में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट अब धार्मिक पर्यटन से आगे बढ़कर आर्थिक विकास का इंजन बनता जा रहा है। प्रदेश के प्रमुख बौद्ध स्थलों—सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कौशाम्बी, संकिसा और कपिलवस्तु—पर वर्ष 2025 में 82 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन इस बात का प्रमाण है कि यूपी वैश्विक बौद्ध समुदाय के लिए एक अनिवार्य गंतव्य बन चुका है।
राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि इन स्थलों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने में तेजी से जुटी है। बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, डिजिटल गाइडेंस, आधुनिक पर्यटन सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सेवाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे विदेशी पर्यटकों को सहज और आकर्षक अनुभव मिल सके। इसके साथ ही होटल उद्योग, परिवहन, टूर गाइड, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को भी नई गति मिल रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
कुशीनगर में हाल ही में संपन्न इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव-2026 ने यूपी की वैश्विक पहचान को और सशक्त किया है। इस आयोजन में 2,300 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जबकि थाईलैंड, जापान, म्यांमार, भूटान और नेपाल सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। कॉन्क्लेव के दौरान लगभग 3,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त होना इस बात का संकेत है कि बौद्ध सर्किट अब निवेश के लिहाज से भी आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
एक अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की नीति प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है। ‘विकसित उत्तर प्रदेश@2047’ के रोडमैप में बौद्ध सर्किट की अहम भूमिका तय की गई है। इसके तहत पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में प्रदेश का योगदान मौजूदा 9.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047 तक 16 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही यूनेस्को से मान्यता प्राप्त विरासत स्थलों की संख्या सात से बढ़ाकर 20 करने की योजना है। भगवान बुद्ध से जुड़ी यह पावन धरती—जहां उन्होंने प्रथम उपदेश दिया और महापरिनिर्वाण प्राप्त किया—आज एक नई वैश्विक पहचान गढ़ने की दिशा में अग्रसर है। सुनियोजित नीतियां, अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की सफलता और बढ़ते निवेश प्रस्ताव इस बात के संकेत हैं कि उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट आने वाले समय में आध्यात्मिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से नई ऊंचाइयों को छूने वाला है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *