शिक्षामित्रों-अनुदेशकों का बढ़ाया गया मानदेय, यूपी कैबिनेट ने दी मंजूरी

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लखनऊ{ गहरी खोज }: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोक भवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश के विकास और जनहित से जुड़े कुल 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस बैठक को प्रदेश सरकार की नीतिगत दिशा तय करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा के बाद उन्हें सर्वसम्मति से पारित किया गया।
बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि 20 से अधिक प्रस्तावों पर विचार किया गया और उन्हें स्वीकृति दी गई। उन्होंने कहा कि भीमराव अंबेडकर सहित भारतीय संविधान के निर्माताओं की प्रतिमाओं के संरक्षण और सौंदर्यीकरण का कार्य किया जाएगा। इसके तहत उनकी प्रतिमाओं पर छत और चबूतरे बनाए जाएंगे तथा उनका नवीनीकरण किया जाएगा। इस अभियान की शुरुआत 14 अप्रैल से की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जब भी राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार रही है, तब एक हजार से ज्यादा दंगे हुए हैं। लोग अभी भी मुजफ्फरनगर दंगों को नहीं भूले हैं। समाजवादी पार्टी के शासन में दंगे होना, ये दोनों एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। समाजवादी पार्टी के शासनकाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी।
उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, “आप सभी जानते हैं कि हमारी बहनों को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए उन्हें सम्मानित किया है। 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग कई वर्षों से चल रही थी। मैं संसद में मौजूद था और समाजवादी पार्टी ने महिला आरक्षण विधेयक का विरोध किया, जबकि कांग्रेस पार्टी चुप रही और बस देखती रही। मैं आधी आबादी को सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तहे दिल से बधाई और धन्यवाद देता हूं। ऐसा काम जो आज़ादी के बाद से कोई नहीं कर पाया था।”
मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अपने विभाग से जुड़े वेतन संबंधी प्रस्ताव का जिक्र किया। मदरसा बोर्ड के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ऐसा कोई नया बिल नहीं लाया गया है। उन्होंने कहा कि जिस कानून की चर्चा हो रही है, वह वर्ष 2016 में समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान पारित किया गया था जिसे बाद में कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है।
उन्होंने कहा, “महिलाओं के लिए आरक्षण आधी आबादी के लिए है, तो क्या उन्हें आरक्षण नहीं मिलना चाहिए? क्या उन्हें विधानसभाओं में नहीं जाना चाहिए? पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह वहां बैठकर जो काम कर रहे हैं, उसे जिस तरह से संभाल रहे हैं, वह बिल्कुल सही है।”
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि शिक्षामित्रों के लिए यह दिन ऐतिहासिक है। कैबिनेट ने उनके मानदेय को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपए प्रतिमाह करने का निर्णय लिया है। साथ ही अनुदेशकों का मानदेय 9,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये कर दिया गया है। इस फैसले से प्रदेश के लगभग दो लाख परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं, मंत्री जयवीर सिंह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश की जनता ‘जंगलराज’ को नहीं भूली है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में हुए अत्याचारों को जनता याद रखे हुए है और अखिलेश यादव को माफ नहीं करेगी। मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर कैबिनेट ने ठोस निर्णय लिए हैं। उन्होंने विपक्ष पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है।

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