उप्र में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सामान्य तथा स्टॉक की पर्याप्त उपलब्धता : भंडारी

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  • पिछले 10 दिनों में 84 गैस एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी की गयी है : इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन
  • नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे घबराहट में खरीदारी से बचें : राज्य प्रमुख संजय भंडारी

लखनऊ{ गहरी खोज }: इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के कार्यकारी निदेशक एवं राज्य प्रमुख संजय भंडारी ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति स्थिति पूर्णतः सामान्य तथा स्टॉक की पर्याप्त उपलब्धता है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के कार्यकारी निदेशक एवं राज्य प्रमुख संजय भंडारी ने सोमवार को गोमतीनगर स्थित कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि उत्तर प्रदेश में पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी सहित सभी पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति स्थिति पूरी तरह सामान्य एवं नियंत्रण में है। राज्य में उपलब्ध हमारे मजबूत बुनियादी ढांचे, सतत निगरानी व्यवस्था तथा प्रभावी समन्वय तंत्र के माध्यम से निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
राज्य में वर्तमान में कुल 13,168 रिटेल आउटलेट (ओएमसी: 12,331 एवं निजीः 863) तथा 28 सप्लाई लोकेशन/डिपो संचालित हैं। औसतन प्रतिदिन 16 टी.के.एल. पेट्रोल (एमएस) एवं 30 टीकेएल डीजल (एचएसडी) उपलब्ध करवाया जा रहा है। वर्तमान में पेट्रोल का 18 दिन तथा डीजल का 16 दिन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सभी रिटेल आउटलेट सामान्य रूप से कार्यरत हैं तथा बिक्री पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है। भंडारी ने बताया कि जनवरी-मार्च 2026 की सामान्य खपत के अनुरूप नोज़ल सेल हो रही है, जो मांग की स्थिरता को दर्शाती है। नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे घबराहट में खरीदारी से बचें।
अगर हम एलपीजी आपूर्ति की बात करें तो राज्य में 4,143 वितरकों एवं 36 बॉटलिंग प्लांट के माध्यम से लगभग 4.88 करोड़ उपभोक्ताओं को सेवा प्रदान की जा रही है। वर्तमान में वितरकों के पास 1.5 दिन का स्टॉक उपलब्ध है। औसतन प्रतिदिन 8.7 लाख रिफिल की डिलीवरी की जा रही है तथा लगभग 4.5 दिन का बैकलॉग निर्धारित बुकिंग सूची के अनुसार पूरा किया जा रहा है। एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है।
भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 68% का वर्तमान आवंटन स्तर बनाए रखा गया है। अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, रक्षा, रेलवे, सरकारी प्रतिष्ठान, होटल/रेस्टोरेंट, इंडस्ट्रियल कैंटीन्स तथा फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को प्राथमिकता दी जा रही है। सुचारु वितरण सुनिश्चित करने हेतु प्रतिदिन निगरानी की जा रही है।
एलपीजी सेवाओं में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देते हुए 92% बुकिंग डिजिटल माध्यम से की जा रही है, जबकि 91% मामलों में डिलीवरी प्रमाणीकरण कोड (डीएसी) का अनुपालन सुनिश्चित किया गया है। उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि वे डिजिटल माध्यम से ही बुकिंग करें तथा सुरक्षित एवं पारदर्शी वितरण हेतु डिलीवरी के समय डीएसी साझा करें।
पीएनजी के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य में लगभग 20 लाख पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध हैं। पिछले एक माह में 28,210 नए कनेक्शन जोड़े गए हैं तथा 44 जनपद सीजीडी नेटवर्क के अंतर्गत आ चुके हैं। सरकार द्वारा त्वरित अनुमति, पाइपलाइन बिछाने हेतु फास्ट ट्रैक क्लीयरेंस एवं स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय के माध्यम से नेटवर्क विस्तार को गति दी जा रही है। इससे शहरी क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भरता में कमी आएगी।
राज्य सरकार, नागरिक आपूर्ति विभाग एवं ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के बीच दैनिक समन्वय बैठकें आयोजित की जा रही हैं। जिला स्तरीय निगरानी समितियां सक्रिय हैं तथा प्रतिदिन प्रातः 10 बजे तक राज्य कंट्रोल रूम को स्टॉक रिपोर्ट प्रेषित की जा रही है। जमाखोरी एवं अवैध डायवर्जन पर नियंत्रण हेतु अब तक 21 हजार 939 निरीक्षण किए गए हैं। इस दौरान 12 हजार 330 सिलेंडर जब्त, 245 एफआईआर दर्ज तथा 22 गिरफ्तारियां की गई हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त कार्रवाई जारी है।
हम यह पूरी तरह स्पष्ट करना चाहते हैं कि राज्य में पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आपूर्ति श्रृंखला सामान्य रूप से कार्य कर रही है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, घबराहट में खरीदारी से बचें तथा फर्जी समाचारों का प्रसार न करें। उत्तर प्रदेश सरकार एवं उत्तर प्रदेश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियाँ आप सबको आश्वस्त करती हैं कि राज्य में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति स्थिति पूरी तरह स्थिर एवं नियंत्रित है तथा आम जनता को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। कृषि विभाग के अपर कृषि निदेशक आशुतोष मिश्रा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने अगले छह माह का आंकलन कर लिया है। उसी हिसाब से भारत सरकार से मांग की गयी। हमारे पास उर्वरक की कोई कमी नहीं है। यदि कोई अफवाह फैलाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। एक सवाल के जवाब में भंडारी ने बताया कि पिछले 10 दिनों में 84 गैस एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी की गयी है। वे नियमानुसार सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। यदि सुधार नहीं किये तो उनके लाइसेंस निरस्त कर दिए जाएंगे।

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