न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में मालदा के एडीएम को कारण बताओ नोटिस

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कोलकाता{ गहरी खोज }: पश्चिम बंगाल में मालदा जिले के कालियाचक में 1 अप्रैल की रात को न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में जिले के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (कानून और व्यवस्था) शेख अंसारी अहमद को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। शेख अंसारी अहमद भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं। उन पर अपने कर्तव्य में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है।
यह नोटिस 4 अप्रैल को मालदा के जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय द्वारा जारी किया गया। नोटिस में उनसे कहा गया है कि नोटिस मिलने की तारीख से सात दिनों के अंदर अपना जवाब दें। अगर उन्होंने समय पर जवाब नहीं दिया तो यह माना जाएगा कि उन्होंने अपनी गलती स्वीकार कर ली है और उनके खिलाफ बिना किसी और सूचना के एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
नोटिस में साफ लिखा है कि एडीएम शेख अंसारी अहमद को पहले ही सख्त निर्देश दिए गए थे कि जिले में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए वे स्थिति पर लगातार और सख्त नजर रखें। साथ ही नागरिक प्रशासन, पुलिस और अन्य विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखें। उन्हें खास तौर पर यह निर्देश दिया गया था कि वे खुद कालियाचक क्षेत्र में जाएं और सभी संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में रहें। इसका मकसद था कि जमीनी स्तर पर स्थिति की सही जानकारी रहे और अगर कोई समस्या बढ़े तो तुरंत उच्च अधिकारियों को बताई जा सके।
अब एडीएम शेख अंसारी अहमद को इस लापरवाही पर जवाब देना होगा। कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि 1 अप्रैल को दोपहर 3 बजकर 30 मिनट से रात 8 बजकर 30 मिनट तक संबंधित एडीएम मौके पर मौजूद होने के बावजूद अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह असफल रहे। आरोप है कि उन्होंने स्थिति की गंभीरता के बारे में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को समय पर जानकारी नहीं दी।
नोटिस के अनुसार, इन पांच घंटों के दौरान उच्च प्रशासन को जमीन पर क्या हो रहा है, इसकी कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई। इसका सीधा असर यह हुआ कि प्रशासन समय रहते जरूरी कदम नहीं उठा सका और स्थिति को संभालने में देरी हुई।
नोटिस में इस लापरवाही को बेहद गंभीर माना गया है। इसमें कहा गया है कि यह कर्तव्य की बड़ी अनदेखी है और एक अधिकारी के रूप में उन पर जो भरोसा किया गया था, उसका भी उल्लंघन है। साथ ही यह भी कहा गया है कि इस तरह का व्यवहार एक आईएएस अधिकारी के पद के अनुरूप नहीं है। इस लापरवाही के कारण सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा पैदा हो सकता था और प्रशासन भी उस समय अपनी जिम्मेदारियां सही तरीके से निभाने में असमर्थ हो गया।
नोटिस में आगे कहा गया है कि प्रथम दृष्टया यह आचरण ऑल इंडिया सर्विस रूल्स 1968 के नियम 3(1) का उल्लंघन है। इस नियम के अनुसार, हर अधिकारी को अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण बनाए रखना जरूरी होता है। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस तरह की लापरवाही विशेष रूप से उस समय और भी गंभीर मानी जाती है, जब अधिकारी कानून-व्यवस्था जैसे संवेदनशील मामले की जिम्मेदारी संभाल रहा हो।

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