प्रधानमंत्री की मुख्यमंत्रियों से बात
- इरविन खन्ना
संपादकीय { गहरी खोज }: ईरान की अमेरिका व इजराइल के साथ शुरू हुए युद्ध के कारण विश्व की राजनीतिक ही नहीं आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है। होर्मुज जलमार्ग के बंद होने के कारण समुद्री जहाजों की आवाजाही थम गई है। परिणामस्वरूप जहाजों पर लदा सामान भी अपने लक्ष्यों तक नहीं पहुंच पा रहा। इस कारण एक अनिश्चितता का माहौल बन गया है। भारत में भी गैस और तेल को लेकर जिस तरह की अफवाहें फैली उसका असर यह हुआ कि पैट्रोल पंपों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। गैस के सिलैंडरों के लिए हाहाकार सी मच गई जबकि देश में न तो गैस की कमी है और न ही तेल या डीजल की। प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के भीतर भी स्थिति को स्पष्ट किया और जन साधारण के सामने भी देश की स्थिति को रखा। देश में तेल व गैस का 60 दिनों का भंडार अभी भी है और गैस व तेल से भरे जहाज आ भी रहे।
युद्ध अगर लंबा खिंचता है तो उस स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत शुक्रवार केंद्र शासित प्रदेश और राज्य के मुख्यमंत्रियों से बातचीत की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राज्य सरकारें जमाखोरी व मुनाफाखोरी के मामलों में सख्ती से निपटें। उन्होंने कहा कि टीम इंडिया के रूप में मिलकर काम करने से देश को इस स्थिति से भी उभर जाएगा। इस समय सरकार की प्राथमिकता आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, नागरिकों के हितों की रक्षा करना और उद्योग एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना है। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को देश भर के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सीधी बात की। मोदी ने कहा कि घबराहट को रोकने के लिए सटीक और विश्वसनीय जानकारी का समय पर प्रसार आवश्यक है। उन्होंने आनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी एजेंटों से सावधान रहने की भी सलाह दी। उन्होंने जनता का विश्वास बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता के बारे में आश्वासन देने से नागरिकों में अनावश्यक घबराहट को रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने पश्चिम एशिया में नागरिकों वाले राज्य प्रभावित परिवारों की सहायता करने और सूचना के समय पर प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए हेल्पलाइन सक्रिय करें, नोडल अधिकारी नियुक्त करें और जिला स्तरीय सहायता प्रणाली स्थापित करें। मोदी ने कहा कि भारत को इसी तरह की वैश्विक चुनौतियों से निपटने का पूर्व अनुभव है। कोरोना काल में जब केंद्र और राज्यों ने टीम इंडिया के रूप में मिलकर आपूर्ति श्रृंखलाओं, व्यापार और दैनिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए काम किया था। सहयोग और समन्वय की यही भावना वर्तमान परिस्थितियों से निपटने में भारत की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि स्थिति लगातार बदल रही है, जिसके लिए निरंतर निगरानी और अनुकूल रणनीतियों की आवश्यकता है। ईरान के अमेरिका व इजराइल के साथ चल रहे युद्ध के कारण देश के सामने आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ कृषि, स्वास्थ्य व उद्योग, व्यापार, देश सुरक्षा से जुड़ी एक नहीं कई चुनौतियां हैं। इनका सामना राष्ट्रीय भावना से जब करेंगे, तभी संकट की इस घड़ी से हम पार पा पायेंगे। केंद्र और राज्यों की सरकारों के साथ जन साधारण को भी समय की नजाकत को समझते हुए सहयोग करने की आवश्यकता है।
