बाघ‑तेंदुए के अंगों की तस्करी में दोषी पाए गए छह आरोपी, सीबीआई कोर्ट ने भेजा जेल

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लखनऊ{ गहरी खोज }: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कोर्ट लखनऊ ने बाघ और तेंदुए के अंगों को अवैध रूप से रखने और उनकी तस्करी से जुड़े एक बड़े वन्यजीव तस्करी मामले में छह व्यक्तियों मुमताज अहमद, जैबुन निशा, अजीज उल्लाह, वहीद, सरताज और मजीद को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 10,000 रुपए के जुर्माने के साथ दो साल कैद की सजा सुनाई।
यह मामला जांच के दौरान चलाए गए एक बड़े बरामदगी अभियान से जुड़ा है, जिसमें आरोपियों के घरों से प्रतिबंधित वन्यजीव वस्तुओं की भारी मात्रा जब्त की गई थी। जब्त की गई वस्तुओं में तेंदुए के 18,000 नाखून, तेंदुए की 74 खालें, बाघ की चार खालें और बाघ व तेंदुए की हड्डियां शामिल थीं।
इन वस्तुओं को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत वर्गीकृत किया गया है जो इन्हें उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान करती है और इन्हें अपने पास रखने, इनका व्यापार करने या इनका परिवहन करने पर सख्त प्रतिबंध लगाती है। सीबीआई ने यह मामला 23 मार्च 2000 को दर्ज किया था और एक गहन व बारीकी से जांच करने के बाद 15 जुलाई 2000 को लखनऊ स्थित सक्षम न्यायालय के समक्ष शिकायत (चार्जशीट) दायर की थी। जांच में वन्यजीवों की प्रतिबंधित वस्तुओं की संगठित तस्करी और अवैध व्यापार में आरोपियों की सक्रिय संलिप्तता साबित हुई।
अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने सभी छह आरोपियों को दोषी पाया और उन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 49 बी और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 51 के तहत मुख्य अपराधों के लिए दोषी ठहराया। अधिकारियों का कहना है कि यह दोषसिद्धि वन्यजीव अपराधों से निपटने और अवैध तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने के प्रति सीबीआई की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। उम्मीद है कि यह दोषसिद्धि वन्यजीव तस्करी में शामिल अपराधियों के लिए एक कड़ा निवारक के रूप में काम करेगी और लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण व सुरक्षा में योगदान देगी।

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