‘रोबोटिक सर्जरी आम लोगों की पहुंच में लाएगी सरकार’ : मुख्यमंत्री सुक्खू

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शिमला{ गहरी खोज }: प्रदेश के चार सरकारी अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं और सरकार का प्रयास है कि इस आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा को आम लोगों की पहुंच तक लाया जाए। इन मशीनों की खरीद ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के माध्यम से की गई है और इनके संचालन के लिए अस्पतालों के स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक करीब 20 डॉक्टरों को इस तकनीक के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये जानकारी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु ने मंगलवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी आम मरीजों के लिए महंगी न पड़े, इसके लिए सरकार आर्थिक सहायता भी दे रही है। उन्होंने बताया कि गरीब वर्ग के मरीजों को इस सर्जरी पर करीब 70 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि जो मरीज स्पेशल वार्ड की सुविधा लेते हैं, उन्हें यह अनुदान नहीं मिलेगा।
उन्होंने विधानसभा में बताया कि सरकारी अस्पतालों में एक रोबोटिक सर्जरी पर औसतन करीब 1 लाख रुपये का खर्च आता है, जबकि निजी अस्पतालों में यही सर्जरी लगभग 5 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध होने से आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
विधायकों राकेश जमबाल, केवल सिंह पतगनिया, विपिन सिंह परमार और सुरेंद्र सौरी के संयुक्त प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में रोबोटिक सर्जरी और एमआरआई जैसी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का चरणबद्ध विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एम्स दिल्ली से लगभग 1 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से मशीन खरीदी गई है, जिसका पांच वर्षों तक रखरखाव संबंधित कंपनी द्वारा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि आयुष्मान भारत केंद्र सरकार की योजना है, जबकि राज्य सरकार हिमकेयर योजना के तहत रोबोटिक सर्जरी सुविधा को शामिल करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं और इन क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी कर्मचारियों को इस सुविधा के लिए निर्धारित नियमों के तहत प्रतिपूर्ति (रिइम्बर्समेंट) भी दी जाएगी।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस योजना को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जब एक ऑपरेशन पर करीब 1 लाख रुपये का खर्च आता है, तो यह सुविधा सीमित वर्ग तक ही सिमट सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को पहले सीमित अस्पतालों में इस सुविधा को पूरी तरह व्यवस्थित तरीके से लागू करना चाहिए और स्टाफ को पूर्ण प्रशिक्षण देने के बाद ही इसका विस्तार किया जाना चाहिए।

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