प्रशांत महासागर के ऊपर आसमान में एक ऐसा खूबसूरत और दुर्लभ नजारा देखने को मिला जो देखने में इंद्रधनुष जैसा लगता

0
20260330171720_39

नई दिल्ली विज्ञान { गहरी खोज }: प्रकृति की खूबसूरती नदियों, पहाड़ों तक सीमित नहीं हैं। ये खूबसूरती पानी की बूंद से लेकर बादलों तक के रूप में फैले हुए हैं। साल 2012 में प्रकृति की ऐसी ही खूबसूरती अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के सैटेलाइट टेरा में कैद हुई। प्रशांत महासागर के ऊपर आसमान में एक ऐसा खूबसूरत और दुर्लभ नजारा देखने को मिला जो देखने में इंद्रधनुष जैसा लगता है। वैज्ञानिकों ने इस नेचर ब्यूटी को नाम दिया ग्लोरी। नासा के टेरा उपग्रह ने 21 जून 2012 को इस आश्चर्यजनक ऑप्टिकल घटना की तस्वीर कैद की। ‘ग्लोरी’ जिसे स्ट्रैटोक्यूम्यलस स्काई की पतली परत में देखा जा सकता है। वैज्ञानिक विस्तार से बताते हैं कि ग्लोरी क्या है और इसके पीछे का विज्ञान क्या है? ग्लोरी एक खास प्रकार की ऑप्टिकल घटना है जो आमतौर पर धुंध, कोहरे या पतले बादलों के सामने रंगीन संकेंद्रित छल्लों के रूप में दिखाई देती है। यह तब बनती है जब बादलों में मौजूद छोटी-छोटी पानी की बूंदें सूरज की रोशनी को वापस सूरज की ओर बिखेर देती हैं। यह प्रक्रिया ‘पश्च विवर्तन’ या बैकवर्ड डिफरेक्शन कहलाती है। सूरज की रोशनी बादलों की बूंदों से टकराती है और पीछे की ओर मुड़कर वापस आती है, जिससे रंगीन छल्ले बन जाते हैं। सबसे सुंदर और चमकदार ग्लोरी तब बनती है, जब बादलों की बूंदों का आकार 10 से 30 माइक्रोन के बीच हो और सभी बूंदें लगभग एक समान हों।देखने में ग्लोरी इंद्रधनुष जैसी लगती है, लेकिन दोनों के बनने का तरीका पूरी तरह अलग है। इंद्रधनुष प्रकाश के अपवर्तन और परावर्तन से बनता है, जबकि ग्लोरी विवर्तन की वजह से बनती है। ग्लोरी हमेशा सूरज के ठीक विपरीत दिशा में दिखाई देती है, जिसे ‘एंटी-सोलर पॉइंट’ कहते हैं। जमीन या हवाई जहाज से ग्लोरी गोलाकार छल्लों के रूप में दिखती है। हालांकि नासा के मोडिज उपकरण से पृथ्वी को स्कैन किया गया, इसलिए ग्लोरी यहां रंगीन पट्टियों के दो लंबे बैंड के रूप में दिखाई दी थी। इन पट्टियों के बीच में ही एंटी-सोलर पॉइंट स्थित है। ग्लोरी को साफ दिखने के लिए सफेद बादलों की पृष्ठभूमि जरूरी होती है। बादल सफेद इसलिए दिखते हैं क्योंकि उनमें मौजूद बूंदें सूरज की रोशनी को बार-बार बिखेरती हैं। अगर सफेद बादल न हों तो ग्लोरी बन ही नहीं सकती।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *