युवा नेतृत्व से ही मजबूत होगा लोकतंत्र, इसलिए छात्र संघ चुनाव जरूरी: उमंग सिंघार

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भाेपाल{ गहरी खोज }: मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने के लिए युवा नेतृत्व का सशक्त होना बेहद जरूरी है और इसके लिए छात्र संघ चुनाव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उमंग सिंगार साेमवार काे मध्य प्रदेश विधानसभा में आयोजित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के युवा विधायक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर लोकतांत्रिक मूल्यों, विधानसभा की कार्यप्रणाली और जनसेवा के प्रभावी तरीकों पर विस्तृत चर्चा हुई। सम्मेलन में मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित युवा विधायक मौजूद रहे।अपने संबोधन में सिंघार ने कहा कि नेतृत्व किसी पद से नहीं, बल्कि कॉलेज जीवन से शुरू होता है। उन्होंने कहा कि छात्र संघ चुनाव युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सशक्त माध्यम रहे हैं, लेकिन हमारे यहां छात्र संघ चुनाव बंद हो गए, इनके बंद होने से युवाओं को मंच नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र संघ चुनाव युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम रहे हैं। कॉलेज के समय युवाओं के अंदर सिस्टम से लड़ने की ऊर्जा होती है, वहीं से सोच और बदलाव की शुरुआत होती है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चुनाव जीतना कोई कला नहीं, बल्कि जनता से दिल से जुड़ाव ही जनप्रतिनिधि की असली ताकत है। यदि प्रतिनिधि ईमानदारी से काम करें, तो हार की संभावना कम हो जाती है। उन्होंने युवा विधायकों से कहा कि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं को गंभीरता से उठाएं, क्योंकि जनता यह देखती है कि विधानसभा में उनकी आवाज कितनी प्रभावी तरीके से रखी जा रही है।
नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने कि आप सभी बदलाव चाहते हैं, आपकी सोच नई है और आप लोकतंत्र में अपनी सक्रिय भागीदारी चाहते हैं। लोकतंत्र की जड़ें तभी मजबूत होंगी, जब देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था सशक्त रहेगी। डिजिटल युग में एआई और डेटा साइंस के बढ़ते प्रभाव के बीच इसका जिम्मेदारी से उपयोग करना आवश्यक है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चुनाव जीतना कोई कला नहीं है, बल्कि जनता से दिल से जुड़ाव ही असली ताकत है। यदि जनप्रतिनिधि ईमानदारी से जनता के काम करें, तो उन्हें हार का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायकों को संसदीय परंपराओं के तहत नियम-कानून बनाने का अधिकार है, लेकिन जनता यह देखती है कि विधानसभा में उनके क्षेत्र की कौन सी समस्याएं उठाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं सभी के लिए होती हैं, इसलिए विकास कार्यों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों को पार्टी से ऊपर उठकर क्षेत्र के समग्र विकास पर ध्यान देना चाहिए।
उमंग सिंघार ने विधानसभा की नियमित बैठकों पर जोर देते हुए कहा कि विधायक अपने क्षेत्र के लाखों लोगों की आवाज होते हैं। लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। उन्होंने अंत में कहा कि सीमित संसाधनों के बीच प्राथमिकता तय कर अधिकतम लोगों को लाभ पहुंचाना ही एक सफल जनप्रतिनिधि की पहचान है।

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