तारीफ तब ही होती है जब आदमी सफल होता है
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: विश्व राजनीति हो या देश की अंदरूनी राजनीति हो,किसी नेता की तब ही तारीफ की जाती है जब जो काम हाथ में लेता है, उसे पूरा करके दिखाता है।जो लक्ष्य तय किया उसे हासिल करके दिखाता है। जो कहा उसे करके दिखाता है। ऐसे नेता पर विश्व भी भराेसा करता है और देश भी भराेसा करता है। ऐसे नेता से ही यह उम्मीद की जाती है कि जो काम कोई और नेेता नहीं कर पा रहा है, उसे यह नेता कर सकता है।उसके बारे में एक के बाद एक नेता कहते रहते हैं, उम्मीद जताते रहते हैं कि इस नेता को आगे आकर यह काम करना चाहिए। विश्व में इस समय ईरान,इजराइल व अमरीका के युध्द के कारण संकट में है। ऊर्जा सप्लाई बाधित होने से सभी देश कम ज्यादा प्रभावित हैं। ऐसे में विश्व के कई लोग कह चुके हैं कि पीएम मोदी ही यह युध्द रुकवा सकते हैं। उनको आगे आकर यह युध्द रुकवाने का प्रयास करना चाहिए।
जब दुनिया के कई देश के नेता यह कहते हैं कि युध्द पीएम ही रुकवा सकते हैं तो यह देश के लोगों के लिए जहां गौरव की बात होती है वहीं कांग्रेस यह सुनकर जलभुन जाती है क्योंकि वह आज तक पीएम मोदी को असफल नेता मानती आई है और वह आए दिन हर मसले पर बयान देती रहती है कि पीएम मोदी इस मामले असफल है। पीएम मोदी विदेश नीति मामले में असफल हैं।वह अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान पर तो यकीन करती है कि भारत पाक युध्द मैंने रुकवा दिया और पीएम मोदी पर आरोप लगाती है कि पीएम मोदी ने ट्रंप के सामने सरेंडर कर दिया। लेकिन वही ट्रंप जब यह कहते हैं कि विश्व में पीएम मोदी और मैं ही ऐसे दो नेता हैं जो काम हाथ में लेते हैं उसे पूरा करके दिखाते हैं।यह बात विश्व के और किसी नेता के बार में नहीं कही जा सकती। इस पर कांग्रेस यकीन नही करेगी, नहीं कहेगी की ट्रंप सच कह रहे हैं।
कांग्रेस को ट्रंप तब सच कहते हुए लगते हैं जब उनके बयान के आधार पर पीएम मोदी को नीचा दिखाया जा सकता है,असफल बताया जा सकता हो।कांग्रेस तो ऐसे मौके की तलाश में रहती है जब वह पीएम को असफल बता सके। कंप्रोमाइस्ड नेता बता सके।हाल ही में कांग्रेस को ऐसा मौका फिर मिला जब अमरीका ने पाकिस्तान को ईरान से शांति वार्ता के लिए मैसेंजर की भूमिका सौंपी तो कांग्रेस की तरफ से कहा गया कि प.एशिया में शांति बहाली के लिए आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान का नाम सामने आना भारत की कूटनीतिक विफलता है। इससे पाकिस्तान विश्व मंच पर प्रासंगिक बनता जा रहा है।मोदी सरकार की कूटनीति,वैश्विक संपर्क और नैरेटिव प्रबंधन की कमजोरियाें के कारण एक अस्थिर देश को पाकिस्तान को ब्रोकर की भूमिका मिल गई है। इससे भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
कांग्रेस भूल सकती है कि पाकिस्तान तो कठपुतली है, उससे जो कहा जाता है वह करता है। अभी अमरीका ने उससे कहा कि शांति की संदेश ईरान को देना है तो वह देने को तैयार हो गया। उसकी कोई स्वतंत्र विदेश नीति नहीं है इसलिए वह इंकार नहीं कर सकता।उसकी कोई हैसियत विश्व में नहीं है, इसलिए ईरान ने ही साफ कह दिया कि उसे पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है। कहां कांग्रेस मान रही थी कि विश्व में पाकिस्तान को महत्व मिल रहा है, कहां ईरान ने बात करने से ही मना कर दिया। इससे कांग्रेस की सोच पर देश के लोगों को हंसी आती है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी मोदी से नफरत से चलते देश को भी कई बार नीचा दिखाने से बाज नही आती है। वह पीएम मोदी को असफल बताने के लिए देश को असफल बताने लगती है।
इस नफरत के कारण वह समझ नहीं पाती है कि पाकिस्तान शांति के लिए मध्यस्थ हो ही नहीं सकता। वह डाकिया हो सकता है। पाकिस्तान और भारत की कोई तुलना नहीं हो सकती। पाकिस्तान की कोई स्वतंत्र विदेश नीति नहीं है,जबकि भारत की स्वतंत्र विदेश नीति है। यही वजह है कि भारत अमरीका की कोई भी बात मानने से मना कर सकता है और फिर भी अमरीका भारत के पीएम की तारीफ कर सकता है।यह तारीफ इसीलिए होती है कि पीएम मोदी शांति व संवाद पर यकीन रखने वाले नेता हैं और वह दुनिया में शांति के लिए कई देशों से संवाद करते रहते है।वह हर देश से बात करने की क्षमता रखते हैं। हर देश उनकी बात सुनता भी है और मानता भी है क्योंकि वह विश्व के हित में बात करते है। जब युध्दरत देश शांति चाहेंगे तो ही मोदी पीसमेकर की भूमिका निबाहने सामने आएंगे। कांग्रेस चाहती है कि वह पाकिस्तान के पीएम की तरह भूमिका निबाहें तो यह कांग्रेेस की सोच है, पीएम मोदी की सोच कांग्रेस की सोच से बेहतर है। कांग्रेस उनके समान सोच नहीं सकती।
