झारखंड हाईकोर्ट में बर्न यूनिट याचिका पर फैसला सुरक्षित

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  • सरकार ने दावा किया सभी जिलों में बर्न यूनिट उपलब्ध
    रांची{ गहरी खोज }: राज्य के सरकारी अस्पतालों, सदर अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में बर्न यूनिट उपलब्ध कराने को लेकर दायर जनहित याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय में गुरुवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया।
    सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य के सभी जिलों में सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज में बर्न यूनिट की व्यवस्था कर दी गई है। बर्न यूनिट के लिए जरूरी आधारभूत संरचना सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है। बर्न यूनिट की आधारभूत संरचना को और बेहतर करने के लिए मॉनिटरिंग की जा रही है। इनमें समुचित चिकित्सक भी उपलब्ध है। वहीं एमिकस क्यूरी(न्याय मित्र) एवं अधिवक्ता दीक्षा द्विवेदी ने अदालत को बताया कि कुछ सरकारी अस्पतालों में बर्न यूनिट के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है, जिसे दूर किया जाना चाहिए।
    उल्लेखनीय है कि प्रार्थी ने राज्य के सभी सदर अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज में बर्न यूनिट चालू करने का आग्रह किया था। पूर्व की सुनवाई के दौरान बर्न यूनिट के संबंध में सरकार ने एक चार्ट संलग्न (अटैच) किया था। जिस पर कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि प्रथम दृष्टया यह चार्ट दर्शाता है कि राज्य के 24 जिलों में से केवल चार जिलों में ही बर्न वार्ड की सुविधाएं संतोषजनक हैं। शेष जिलों के संबंध में केवल सूची संलग्न है। जैसा उल्लेख किया गया है। जबकि वास्तव में ऐसी कोई सूची शपथपत्र के साथ संलग्न नहीं है। इससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि बर्न वार्ड की सुविधाएं उपलब्ध ही नहीं हैं।
    अदालत ने कहा था कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक बर्न वार्ड होना आवश्यक है। साथ ही वह बर्न वार्ड उचित रूप से सुसज्जित होना चाहिए, अन्यथा वह केवल कागजों पर ही बर्न वार्ड बनकर रह जाएगा। अदालत ने मामले में झारखंड के निदेशक-प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं एक विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने, जिसमें राज्य के प्रत्येक जिले में बर्न वार्ड की वास्तविक स्थिति के बारे में सच्ची और स्पष्ट जानकारी देने को कहा था।

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