जैसलमेर में पाकिस्तानी सीमा पर सेना का शक्ति प्रदर्शन, आसमान में गरजे रॉकेट

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जैसलमेर{ गहरी खोज }: जैसलमेर में भारतीय सेना ने बैटलफील्ड थंडर अभ्यास के जरिए अपनी रॉकेट आर्टिलरी की ताकत का प्रदर्शन किया। पिनाका और बीएम-21 ग्रेड जैसे आधुनिक मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चरों ने सटीक और तेज हमलों से अपनी मारक क्षमता दिखाई। इस अभ्यास ने सन्देश दिया कि भारतीय सेना किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
भारतीय सेना की कोणार्क कोर ने ब्लैजिंग स्टील, डिसाइसिव इम्पैक्ट थीम के तहत यह अभ्यास किया। इसमें रॉकेट आर्टिलरी यूनिट्स ने अपनी ऑपरेशनल तैयारी और समन्वय का प्रदर्शन किया। थार के आसमान में एक साथ कई रॉकेट दागे गए, जिससे पूरे क्षेत्र में सेना की ताकत का अहसास हुआ। जैसलमेर फील्ड फायरिंग रेंज में हुए इस अभ्यास के दौरान सैनिकों ने भीषण गर्मी और उड़ती धूल के बीच लगातार प्रशिक्षण लिया। मुख्य आकर्षण लंबी दूरी के लक्ष्यों को पूरी सटीकता से ध्वस्त करना रहा। यह केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि विभिन्न युद्ध प्रणालियों के बेहतर तालमेल की जांच भी थी।
अभ्यास के दौरान ड्रोन और सर्विलांस सिस्टम के साथ रॉकेट लॉन्चरों के तालमेल को भी परखा गया। एक साथ दागे गए रॉकेटों की गूंज कई किलोमीटर तक सुनाई दी, जिसने सेना की तैयारियों का स्पष्ट संकेत दिया। इस अभ्यास ने दिखा दिया कि रेगिस्तानी इलाकों में भी भारतीय सेना की रॉकेट आर्टिलरी पूरी तरह सक्षम है। सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे इलाकों में सैचुरेशन फायर (पूरे क्षेत्र में एक साथ हमला) सबसे प्रभावी होता है, और भारतीय सेना इस क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है।

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