नियमों का पालन करने को कहना, पक्षपात नहीं है

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सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }:
लोकतंत्र में संसद का अपना अहम स्थान है।यहां देश के चुने हुए प्रतिनिधि देश के लिए जरूरी कानून बनाते हैं,देश की गंभीर समस्याओॆं पर चर्चा करते हैं,समाधान का प्रयास करते हैं।यह सब करने के लिए नियम बने हुए हैं इसलिए लोकसभा अध्यक्ष सबसे से संसद के भीतर नियमों का पालन करते हुए अपनी बात कहने को कहते हैं। इससे संसद में व्यवस्था बनी रहती है और सबको अपनी बात कहने का मौका मिलता है और सभी अपनी बात को नियमों के अनुसार कहते हैं और सार्थक बहस हो पाती है। अध्यक्ष किसी भी दल का रहे उसका काम होता है संसद के भीतर जो कुछ हो नियमों के अऩुसार हो, ताकि संसद में व्यवस्था बनी रही,संसद की गरिमा बनी रहे। देश के लोगों को पता रहे कि उसके जनप्रतिनिधि उनके हित में संसद के भीतर क्या कर रहे हैं, क्या कह रहे हैं।
अध्यक्ष यदि नेता प्रतिपक्ष या किसी सदस्य को नियमों का पालन करने को कहता है तो यह किसी के साथ पक्षपात करना नहीं होता है। अध्यक्ष का काम है यदि कोई सदस्य नियमों का पालन नहीं कर रहा है तो उसे बताना कि आप नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। अध्यक्ष नियमोें का पालन न करवाए तो संसद में कौन क्या कह रहा है इसका तो कोई मतलब नहीं रह जाएगा क्योंकि सब के सब एक साथ कहेंगे तो संसद मेें किसने क्या कहा कैसे पता चलेगा क्योंकि शोर में तो किसी की बात सुनी नहीं जा सकती। इसलिए संसद में जब कोई सदस्य कुछ कहता है तो उसका माइक चालू कर बाकी लोगों का माइक बंद रहता है। माइक बंद रहता है तो यह नियम के अनुसार रहता है। सब जानते हैं कि माइक बंद रहता है तो कब बंद रहता है लेकिन लोकसभा अध्यक्ष पर आरोप लगाना है तो कह दिया जाता है उनका माइक बंद कर दिया जाता है।विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाता है। विपक्ष के साथ भेदभाव किया जाता है।
अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान तरुण गोगोई ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान एलओपी राहुल गांधी को २० बार बोलने से रोका।यह सच है कि राहुल गांधी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने २० बोर टोका। गोगोई तो उतना ही सच बता रहे हैं जिससे उनका आधा सच लोगों को पूरा सच लगे. देश के लोगों को लगे कि हां गोगोई सच कर रहे हैं कि राहुल गांधी को संसद में बोलने से रोका गया है लेकिन गोगोई यह सच नहीं बताते हैं कि अध्यक्ष बिरला ने उनको बोलने से २० बार मना किया तो क्यों मना किया. बिरला ने राहुल गांधी को बोलने से इसलिए मना किया वह नियमों के विपरीत बोलने का प्रयास कर रहे थे और बिरला उनको बता रहे थे कि आप नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। संसद में कोई भी सदस्य चाहे वह राहुल गांधी हों या और कोई यदि वह नियमों का पालन नहीं करेगा तो अध्यक्ष तो उसे बताएंगे ही कि आप नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
आज सब जानते हैं कि राहुल गांधी राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर जो कुछ कहना चाह रहे थे वह नियमों के अऩुरूप नहीं था, संसद में किसी किताब को कोई हिस्सा तब ही पढ़ा जा सकता है,जब वह प्रकाशित हो और उसे संसद में रखा जा सके। राहुल गांधी ऐसी किताब को कोई हिस्सा पढ़ना चाह रहे थे जो प्रकाशित ही नहीं हुआ था।राहुल गांधी को गांधी परिवार से होने के कारण बड़ा घमंड और इसी वजह से जब भी उनको अध्यक्ष किसी वजह से रोकते है और टोकते हैं तो उनको बुरा लगता है और उनके आसपास के लोगों को और बुरा लगता है कि आप राहुल गांधी को कैसे रोक या टोक सकते हो। यानी अध्यक्ष से यह अपेक्षा की जाती है कि राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष है और गांधी परिवार से है इसलिए उनके साथ ऐसा व्यवहार कैसे किया जा सकता है जैसा व्यवहार दूसरे आम सदस्यों के साथ किया जाता है।
यही वजह है कि कांग्रेस सहित विपक्ष ने ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया और बहस में फिर से यह बात कही कि वह विपक्ष से भेदभाव करते हैं। यह एक तरह से ओम बिरला को डराने का प्रयास है, दबाव में लाने का प्रयास है कि हम आपको पद से हटा तो नहीं सकते लेेकिन आपको बदनाम जरूर कर सकते हैं आप हमारे साथ भेदभाव करते हैं। गांधी परिवार से होने का राहुल गांधी को जितना घमंड है गांधी परिवार में किसी को नहीं है।यह बात तो गांधी परिवार के कई सदस्यों के आचरण को देखते हुए कहा जा सकता है।यही वजह है कि किरण रिजिजू ने बहस के दौरान यह बात जानबूझकर कही कि राहुल गांधी पं.नेहरू व राजीव गा्ंधी से क्यों नहीं सीखते संसदीय मर्यादा ताकि यह साबित किया जा सके कि राहुल गांधी ही गांधी परिवार के ऐसे सदस्य है जो संसदीय मर्यादा का पूरा ख्याल नहीं ऱखते हैं।

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