आयुष औषधियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है: कुलपति संजीव शर्मा

0
01359e59328fbbaf57fa988c5e648618

जयपुर{ गहरी खोज }: आयुष औषधियों की सुरक्षा, दुष्प्रभाव (एडीआर) की रिपोर्टिंग और भ्रामक विज्ञापनों की निगरानी जैसे अहम विषयों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर से 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य आयुष फार्माकोविजिलेंस के प्रति जागरूकता बढ़ाना और रिपोर्टिंग सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाना रहा।
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला में पांच तकनीकी सत्र हुए। इन सत्रों में विशेषज्ञों ने आयुष औषधियों की सुरक्षा, दुष्प्रभावों की पहचान और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया, भ्रामक विज्ञापनों की शिकायत कैसे करें तथा आयुष सुरक्षा पोर्टल के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी।
कुलपति प्रोफेसर संजीव शर्मा ने संंबोधित करते हुए कहा कि आयुष मंत्रालय फार्माकोविजिलेंस को लेकर पूरी तरह सजग है और इस गंभीर विषय पर विशेष ध्यान दे रहा है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय पिछले दस वर्षों से राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम को मजबूत और व्यापक बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है।
कुलपति प्रोफेसर संजीव शर्मा ने कहा कि आयुष औषधियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि हम दुष्प्रभावों की सही समय पर रिपोर्टिंग करेंगे तो मरीजों की सुरक्षा और विश्वास दोनों मजबूत होंगे। सभी चिकित्सकों,शोधकर्ताओं और छात्रों को अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
इंटरमीडियरी फार्माकोविजिलेंस सेंटर के समन्वयक प्रोफेसर सुदीप्त रथ और सह-समन्वयक डॉ. तरुण शर्मा ने बताया कि देशभर में करीब 100 परिधीय केंद्र आयुष फार्माकोविजिलेंस के तहत कार्य कर रहे हैं। ये केंद्र आयुष औषधियों से संबंधित दुष्प्रभावों और भ्रामक विज्ञापनों की रिपोर्ट एकत्र कर आगे कार्रवाई के लिए भेजते हैं। इन केंद्रों से 20 जूनियर रिसर्च फेलो ने कार्यशाला में भाग लिया और आयुष सुरक्षा पोर्टल के माध्यम से रिपोर्टिंग की प्रक्रिया का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *