कृषि में एआई का बढ़ेगा उपयोग, स्वास्थ्य और आईटी सेक्टर में भी नई संभावनाएं : मोहन यादव

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में कहा कि राज्य में कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग बढ़ाया जाएगा। मध्य प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है और गेहूं, धान और सोयाबीन उत्पादन में देश में अग्रणी है। किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने, फसलों में होने वाली बीमारियों की समय पर पहचान और रोकथाम के लिए एआई का इस्तेमाल किया जा सकता है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और सही दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी एआई मददगार साबित होगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यहां भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट के एक सत्र के दौरान कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भी एआई का उपयोग बढ़ाया जाएगा, जिससे बीमारियों की समय पर पहचान और सही इलाज संभव होगा। राज्य सरकार आने वाले समय में कई कंपनियों के साथ मिलकर काम करेगी और उनके निवेश का लाभ लेगी। बड़े और छोटे शहरों में आईटी पार्क को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें।
मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार एआई स्टार्टअप्स को भी प्रोत्साहित कर रही है और उन्हें सरकार के साथ काम करने के अवसर दिए जाएंगे। शिक्षा, उद्योग, पर्यटन और ऊर्जा संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी एआई की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में कई कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए गए हैं और निवेशकों को आमंत्रित किया गया है। मोहन यादव ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश की दिशा में राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। एआई के उपयोग से कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योग के साथ-साथ ऊर्जा बचत के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खुलेंगी और मध्य प्रदेश भविष्य में इस पूरे सेक्टर में बड़ी भूमिका निभाएगा।
समिट के दौरान मुख्यमंत्री ने गूगल के अधिकारियों से भी मुलाकात की और तकनीकी सहयोग पर चर्चा की। एआई के साथ जुड़कर दुनिया के साथ कदम मिलाने का यह अच्छा अवसर है। राज्य सरकार कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट डेवलपमेंट, स्टार्टअप सपोर्ट, इंडस्ट्री में उपयोग और रिसर्च एवं इनोवेशन को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने वैश्विक तकनीकी क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। इस दौरान प्रदेश में एआई अवसंरचना को मजबूत करने, सुशासन को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने और ऊर्जा-कुशल, भविष्य-उन्मुख डेटा सेंटर विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण समझौते हुए।

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