जो गलती वामनेताओं ने की,वही ममता कर रही

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सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }:
जो समझदार व दूरदर्शी नेता व राजनीतिक दल होते हैं, वह पिछली सरकार व सत्तारूढ़ राजनीतिक दल की गलितयों से सबक लेते हैं, जो समझदार व दूरदर्शी नेता नहीं होते हैं वह पिछली सरकार व सत्तारूढ़ दल की गललियों से कोई सबक नहीं लेते हैं और जाने अनजाने में वही गलतियां करते हैं जिसकी वजह से जनता ने पिछली सरकार व सत्तारूढ़ दल को सत्ता से हमेशा के लिए हटा दिया था। पं बंगाल मे वामदलों का शासन कई दशकों तक रहा है, इससे साफ है कि शुरू में उन्होंने कुछ तो अ्चछे काम किए या अच्छा काम करने के लिए जनता ने उनको आगे मौका भी दिया। लंबे समय तक सत्ता में रहने पर राजनीतिक दलों में एक अजीब से अहंकार आ जाता है कि हमारे जैसा कोई नहीं है, हम ही सबसे अच्छे हैं। हमारा कोई विकल्प नहीं है। बाद के सालों वामदलों मे भी यह अहंकार आ गया कि हमारा कोई विकल्प नहीं है, हम जो जी चाहे करेंगे और जनता हमको ही चुनने को विवश है।
वामदलों में तो सत्ता का अंहकार कुछ देर से आया इसलिए जनता ने उनको कुछ देर से हटाया है. जिन गलतियों के कारण पं.बंगाल की जनता ने वामदलों को हटाया था, वह सबसे प्रमुख कारण था सत्ता के अहंकार में कानून,लोकतंत्र व जनता किसी की परवाह न करना।अपने खिलाफ बोलने व कुछ करने वालों को डराना, न डरने पर मार देना। सबसे ज्यादा राजनीतिक हिंसा कोई राजनीतिक दल तब करता है जब वह खुद को कानून से ऊपर समझने लगता है। निरंतर सत्ता में रहने के कारण वामदलों के नेताओं ने खुद को कानून से ऊपर से समझना शुरू कर दिया, जब भी कोई राजनीतिक दल खुद को सत्ता के अहंकार में खुद को कानून से ऊपर समझने लगता है तो जनता उसे चुनाव में हराकर अच्छे से समझा देती है कि न तो तुम कानून से ऊपर न ही जनता से ज्यादा ताकतवर है। वामदलों से सत्ता से हटाकर फिर कभी सत्ता नहीं देकर पं. बंगाल की जनता से जो सबक राजनीतिक दलों को दिया था, वह सबक टीएमसी की नेता ममता बैनर्जी भूल गई है।
कांग्रेस व वामदलों तो उनकी गलतियों की सजा पं. बंगाल की जनता ने दे दी है। दोनों को वहां की जनता अब सत्ता के लायक नहीं समझती है।जनता ने ममता बैनर्जी को मौका दिया तो यह सोचकर दिया था कि यह दोनों राजनीतिक दलों से अलग है, ममता बैनर्जी को कांग्रेस व वामदलो की तुलना में ज्यादा ईमानदार, जनता की ज्यादा सेवा करने वाली नेता मानकर जनता ने पहला मौका २०११ में दिया उसके बाद दो बार और मौका दिया। पंद्रह साल में ही ममता बैनर्जी को कांग्रेस व वामदलों से ज्यादा अहंकार आ गया है, यही वजह है कि आज वह काम भी वह करने से नहीं डर रहीं है जो कांग्रेस व वामदलों ने भी नहीं किया। ममता बैनर्जी तो जांच एजेंसी को जांच करने से रोक दी है। जांच एजेसी कही छापा मारती है तो वह किसी तो बताकर नही मारती है, ममता बैनर्जी व पुलिस का कहना है कि उसने बता कर छापा नहीं मारा। यह ईडी की गलती है, ईडी की दूसरी गलती यह है कि जो संस्था टीएमसी व ममता बैनर्जी का काम रही है, उसके यहां छापा क्यों मारा।पहचान पत्र नहीं दिखाए। बंगाल पुलिस ने इसी आधार पर ईडी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच भी शुरू कर दी है।
ईडी के साथ पं. बंगाल में जैसा हो रहा है,शायद किसी राज्य हुआ हो। ईडी कई राज्यो में छापा मारती है, लेकिन किसी राज्य में सीएम या मंत्री छापे वाली जगह जाकर ईडी को जांच करने से कभी नहीं रोका.ईडी की मौजूदगी से जांच स्थल से कोई नेता मंत्री आज तक कोई दस्तावेज नही ले जा सका है। सब जानते है कि यह ईडी का संवैधानिक अधिकार है.। पं. बंगाल पहला ऐसा राज्य है जहां ईडी को जांच करने से रोका गया है और जांच स्थल से ईडी के सामने कई फाइलें लेकर सीएम ममता बैनर्जी व उनके पुलिस के अधिकारी ले गए।यह तो सीधे सीधे खुद का कानून से ऊपर समझना है। ईडी व केंद्र सरकार का यह संदेश देना है कि आप दूसरे राज्य में जांच कर सकते हैं लेकिन पं. बंगाल में हमारी मर्जी के बिना कोई जांच नहीं कर सकते।भ्रष्टाचार करना और उसकी जांच न होने देना.भ्रष्टाचार के सबूत जांच एजेंसी के हाथ से छीन लेना ऐसे काम हैं जिससे जनता में संदेश गया है कि ममता को सत्ता का अहंकार हो गया है, वामदलों से ज्यादा अहंकार हो गया है। यही गलती वामदलों ने की थी,यही कांग्रेस ने की थी,उनको वहम था कि जनता उनके साथ है और हमेशा रहेगी लेकिन जनता उस नेता व राजनीतिक दल के साथ नहीं रहती है जिसे खुद को सबसे बड़ा होने का अहंकार हो जाता है।

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