2036 आओलम्पिक की मेजबानी
संपादकीय { गहरी खोज }: 72वीं नेशनल सीनियर बालीवाल चैम्पियनशिप, जो काशी में आयोजित हो रही है, के शुभारंभ पर समारोह को वर्चुअली संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज भारत के विकास और आर्थिकी की पूरे विश्व में प्रशंसा हो रही है। देश जब विकास करता है तो प्रगति सिर्फ आर्थिक नहीं होती, यह आत्मविश्वास खेल के मैदान तक में भी दिखता है। 2014 के बाद खेल जगत में भारत का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है। खेल के मैदान में जब जेन-जी तिरंगा फहराती है, मुझे गर्व होता है। प्रधानमंत्री ने देश में खेल को लेकर पहले समाज और सरकार के स्तर पर उदासीनता के भाव को याद कराया और कहा वे दिन अब बीत गए। अब युवा खेल को करियर बना रहे हैं। बीते एक दशक में खेलों को लेकर सरकार और समाज दोनों की सोच में बदलाव हुआ है। खेल बजट में वुद्धि हुई और आज भारत का खेल माडल खिलाड़ी केंद्रित हो गया है। इसमें प्रतिभा की पहचान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, पोषण और पारदर्शी चयन
प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है। फीफा अंडर-17 विश्व कप, हाकी विश्व कप और अंतरराष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिताओं सहित 20 से अधिक बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि टारगेट ओलिंपिक पोडियम स्कीम (टीओपीएस) जैसी पहल से भारत का स्पोर्ट्स इको सिस्टम तेजी से बदल रहा है। सरकार मजबूत खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर, बेहतर फंडिंग और खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर पर अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम और खेलो भारत नीति-2025 से प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और खेल संगठनों में पारदर्शिता आएगी। इससे युवा खिलाड़ी शिक्षा और खेल दोनों में एक साथ आगे बढ़ सकेंगे। खेलो इंडिया जैसी योजनाएं प्रतिभाओं को निखारने में गेम चेंजर साबित हो रही हैं।
अतीत में खेलों के प्रति देश में जो उदासीनता का दौर था वह अब समाप्ति की ओर है। देश में खेल और खिलाड़ी के प्रति मोदी सरकार की नीति के परिणामस्वरूप अब खेल और खिलाड़ी के प्रति परिवार, समाज और सरकार के दृष्टिकोन में आया सकारात्मक बदलाव स्पष्ट दिखाई देता है। खिलाड़ियों को दिए जा रहे मान-सम्मान के साथ मिल रही धन राशि वर्तमान में जहां खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करती है वहीं भावी पीढ़ी के खिलाड़ियों को भी प्रेरणा देती है।
2030 के राष्ट्रमंडल खेलों के बाद 2036 की ओलंपिक की मेजबानी अगर सम्भव होती है तो यह देश के लिए एक गर्व का अवसर होगा। प्रधानमंत्री मोदी के इस मामले में प्रयास अगर रंग लाए तो देश के खेल जगत में एक क्रांति आ आएगी। जनसंख्या की दृष्टि से भारत विश्व का सबसे बड़ा देश है। भारत के बाद चीन है, लेकिन ओलंपिक की पदक तालिका में भारत और चीन के पदकों की संख्या में जो अंतर देखने को मिलता है वह हमारी खेल के मैदान में क्या स्थिति है उस कटु सत्य को ही दर्शाता है। भारत को 2036 की ओलंपिक की मेजबानी से पहले खेल संगठनों में दशकों से जो मठाधीश बैठे हैं और खिलाड़ियों को अपनी उंगलियों पर नचाते हैं उनसे मुक्त कराना होगा। खेल संगठनों में खिलाड़ियों की भागीदारी को बढ़ाना होगा।
खेल मंत्रालय ने पिछले दिनों राष्ट्रीय खेल बोर्ड और खेल संबंधी विवादों को सुलझाने के लिए खेल पंचाट बनाने का रास्ता साफ किया है। यह स्वागतयोग्य कदम है लेकिन 2036 की ओलंपिक की मेजबानी के लिए जहां बुनियादी ढांचा मजबूत होना चाहिए, वहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी आवश्यक है। सरकार के बुनियादी ढांचे के साथ-साथ खिलाड़ियों के प्रति भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है तभी पदक तालिका में भारत एक सम्मानजनक स्थान पर आ सकेगा।
