एसआईआर अलोकतांत्रिक प्रक्रिया , चुनाव आयोग तथा भाजपा मतदाताओं के उत्पीड़न के दोषी :ममता बनर्जी
कोलकाता{ गहरी खोज }: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया है कि वे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का कार्य “अवैध, असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक” तरीके से करा रहे हैं।
उन्होंने गंगासागर से लौटने पर पत्रकारों से बात करते हुए मंगलवार को आरोप लगाया कि एसआईआर की प्रक्रिया “गलत और मनमाने” तरीके से चलाई जा रही है। सुश्री बनर्जी ने कहा, “आयोग सब गलत कर रहा है। जीवित लोगों को मृत दिखाया जा रहा है, ऑक्सीजन पाइप लगाये बुजुर्ग लोगों को सुनवाई में घसीटा जा रहा है। पूरी प्रक्रिया एक तमाशा है।”
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “कुछ ऐप्स भाजपा की आईटी सेल की मदद से विकसित किये गये हैं। यह पूरी तरह से अवैध, असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। यह जारी नहीं रह सकता।” मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तीसरी बार पत्र लिखकर एसआईआर में अनियमितताओं का मामला उठाया है। उन्होंने भाजपा पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया और दावा किया कि प्रशासनिक संशोधन की आड़ में लोगों के मतदान के अधिकार छीने जा रहे हैं।
सुश्री बनर्जी की ये टिप्पणियां सोमवार को गंगासागर से की गई उनकी तीखी आलोचना के बाद आई हैं, जहां उन्होंने घोषणा की थी कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस एसआईआर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का सहारा लेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया पर्याप्त तैयारी के बिना चलाई गयी, जिससे आम नागरिकों को बड़े पैमाने पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। सुश्री बनर्जी स्वयं एक बेहतर अधिवक्ता हैं। उन्होंने सोमवार को कहा था, “हम कानून की मदद ले रहे हैं। अदालत कल खुलेगी और हम अदालत में जाएंगे। जरूरत पड़ने पर मैं उच्चतम न्यायालय जाने और जनता की ओर से पैरवी करने की अनुमति भी मांगूंगी।”
मुख्यमंत्री ने आगे आरोप लगाया कि एसआईआर ने मतदाताओं में भय पैदा कर दिया है और दावा किया कि इस प्रक्रिया से जुड़ी दहशत के कारण कई लोगों की मौत हो गई है। उनके अनुसार, एसआईआर से संबंधित सुनवाई के लिए कतारों में खड़े लोगों की भी मौतें हुई थीं। सुश्री बनर्जी ने चुनाव आयोग और भाजपा पर सत्यापन के नाम पर बुजुर्ग और बीमार नागरिकों को अनुचित रूप से परेशान करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची से मनमाने ढंग से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का भी आरोप लगाया और दावा किया कि मतदाताओं को फॉर्म 7 और 8 जमा करने का अधिकार होने के बावजूद लगभग 54 लाख नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और व्हाट्सएप आधारित तंत्रों का उपयोग करके नाम हटाने का आरोप लगाया और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए एक गंभीर खतरा बताया। सुश्री बनर्जी ने चुनाव आयोग और भाजपा दोनों को निशाना बनाते हुए चेतावनी दी कि एसआईआर का इस्तेमाल मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के लिए एक राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है।
