कब मनाया जाएगा पोंगल का त्योहार? जानें इस पर्व का महत्व, नोट कर लें सही तारीखें और शुभ मुहूर्त

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धर्म { गहरी खोज } :वेशभूषा, खानपान और तीज-त्योहारों को लेकर हमारे देश के हर हिस्से की अपनी अलग पहचान है। कई बार तो हम भारतीय एक ही साथ एक ही दिन अलग-अलग धर्मों के पर्वों को सेलिब्रेट कर रहे होते हैं। जैसे लोहड़ी, मकर संक्राति और पोंगल आदि। इसमें से पोंगल दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु का सबसे प्रमुख फसल पर्व माना जाता है। यह त्योहार प्रकृति, सूर्य देव और कृषि से जुड़े पशुधन के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का प्रतीक है। हर साल यह पर्व सौर पंचांग के अनुसार, तमिल माह की पहली तिथि को मनाया जाता है। साल 2026 में भी पोंगल चार दिनों तक पारंपरिक उत्साह और धार्मिक विधि-विधानों के साथ मनाया जाएगा। यहां जानिए पोंगल 2026 की सही तारीखें और मुहूर्त

कब मनाया जाएगा पोंगल

सौर पंचांग के अनुसार पोंगल तमिल माह ‘थाई’ के पहले दिन मनाया जाता है। वर्ष 2026 में पोंगल पर्व 14 जनवरी से 17 जनवरी 2026 तक मनाया जाएगा। इस दौरान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का क्षण यानी संक्रांति शाम 5 बजकर 43 मिनट पर रहेगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

पोंगल: तमिलनाडु का चार दिवसीय फसल उत्सव

बता दें कि पोंगल को तमिलनाडु का सबसे बड़ा फसल पर्व कहा जाता है। यह त्योहार अच्छी फसल, सूर्य की कृपा और पशुधन के योगदान के लिए धन्यवाद प्रकट करने का अवसर देता है। इन चार दिनों में घरों को सजाया जाता है, पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं।

पहला दिन: भोगी पोंगल

पोंगल उत्सव की शुरुआत भोगी पोंगल से होती है। इस दिन इंद्र देव की पूजा की जाती है। लोग पुराने और अनुपयोगी सामान को जलाकर जीवन में नई शुरुआत का संदेश देते हैं। कई जगहों पर महिलाएं अलाव के चारों ओर पारंपरिक गीत और नृत्य के साथ उत्सव मनाती हैं।

दूसरा दिन: सूर्य (थाई) पोंगल

थाई पोंगल उत्सव का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है। खुले स्थान पर नए मिट्टी के बर्तन में दूध, गुड़ और नई फसल के चावल से पोंगल (खीर) बनाई जाती है। दूध का उफान मारकर बाहर आना सुख-समृद्धि का शुभ संकेत माना जाता है।

तीसरा दिन: मट्टू पोंगल

तीसरे दिन मट्टू पोंगल मनाया जाता है, जिसमें गाय और बैलों की पूजा होती है। कृषि में उनके योगदान के लिए उन्हें स्नान कराकर सजाया जाता है और विशेष सम्मान दिया जाता है।

चौथा दिन: कन्या (कानुम) पोंगल

पोंगल का अंतिम दिन कन्या या कानुम पोंगल कहलाता है। इस दिन परिवार, रिश्तेदार और मित्र एक-दूसरे से मिलते हैं। यह दिन सामाजिक और पारिवारिक मेल-जोल के लिए खास माना जाता है।

पोंगल पर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

पोंगल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का उत्सव है। इसमें सूर्य देव, इंद्र देव और पशुधन की पूजा कर अच्छी फसल और खुशहाल जीवन की कामना की जाती है। यही कारण है कि पोंगल आज भी तमिल संस्कृति की आत्मा माना जाता है। अब देश के अन्य हिस्सों में तमिलमाडु के लोगों की बसाहट के साथ ही अब इस त्योहार का भी विस्तार हो चुका है, जिसके कारण देशभर में कई जगहों पर पोंगल सेलिब्रेट किया जाता है।

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