अब माफी मांगे तो मुश्किल और न मांगें तो मुश्किल
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: राजनीति में बोलने की आजादी सबको है,सब रोज बोलते हैं, एक दूसरे के खिलाफ बोलते हैं, मजा लेकर बोलते हैं, कटाक्ष करते हैं, कहानी सुनाते हैं, इसी बहाने आलोचना करते हैं, मजाक उड़ाते है और अपमान भी करते हैं। बोलने वाला नेता कब आलाेचना कर रहा है, कब मजाक बना रहा है, कब अपमान कर रहा है, इसकी सीमा रेखा तो होती नहीं है।बोलने वाला तो सोचना है कि उसने कुछ भी गलत नहीं कहा है।उसने जो कहा है सही कहा है लेकिन कई बार ऐसा होता है कि बोलने वाले को पता नहीं चलता है कि वह आलोचना करते करते कब किसी का अपमान कर बैठता है। कई बार बोलने वाले को नहीं लगता है कि उसने किसी का अपमान किया है लेकिन जिसके बारे में कहा जाता है उसे और सुनने वाले लोगों को लगता है कि यह तो अपमान हो गया।राजनीति में चूक सबसे होती है और सबको बोलने का मौका मिलता है।
इस बार पूर्व सीएम भूपेश बघेल से चूक हो गई है और बोलने का मौका भाजपा वालों को मिल गया है, साहू समाज को मिल गया है। भूपेश बघेल ने अपने बिलासपुर दौरे के दौरान एक बंदर की कहानी सुनाई।जंगल के लोग एक बार मिलकर बंदर को राजा बना देते हैंं,बंदर के राजा बनने के बाद शेर हिरण के बच्चे को पकड़ लेता है, हिरण बंदर से बचाने को कहता है तो बंदर एक डाल से डाल से दूसरी डाल पर कूदता रहता है और कहता है कि मेरे प्रयास में कोई कमी है क्या।भूपेश बघेल से चूक यह हो गई कि उन्होंने बंदर की तुलना डिप्टी सीएम साव से कर दी,इस पर सबसे पहले मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि पूर्व मंत्री को ऐसी भाषा शोभा नहीं देती है,वह चुनावी झटके से विचलित होकर ऐसा बयान दे रहे हैं।इसके बाद डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने भी कहा है कि भूपेश बघेल बड़े नेता है, उनको ऐसी भाषा शोभा नहीं देती है, शब्दों की मर्यादा होती है जिसे समझना चाहिए। वह न शब्दों की मर्यादा समझते हैं और न ही भ्रष्टाचार में कोई सीमा रखी है।उन्होंने ऐसा भ्रष्टचार किया है जैसा पहले कभी देखने काे नहीं मिला।उन्होंने तो भ्रष्टाचार में नवाचार किया है।
बोलने का मौका मिलता है तो सब बोलते हैं और खूब बोलते है, खुलकर बोलते हैं, बड़ा आदमी भी कहते हैं और छोटे काम की चर्चा भी करते हैं।मौका मिला तो प्रदेश साहू संघ ने डिप्टी सीएम अरुण साव के खिलाफ की गई भूपेश बघेल की टिप्पणी को अत्यंत अमर्यादित, आपत्तिजनक और निंदनीय बताया है। साथ ही कहा है कि अपनी टिप्पणी के लिए भूपेश बघेल १० दिन के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। वह ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ समाज आंदोलन करेगा।यही नहीं समाज के अध्यक्ष ने सभी जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर कहा है कि वह भी भूपेश बघेल से क्षमा मांगने के लिए कहें। ऐसा नहीं किया जाता है तो समाज चरणबध्द आंदोलन करेगा। इस मामले में कांग्रेस के और किसी नेता का बयान तो नहीं आया है लेकिन टीएस सिंहदेव का बयान आया है कि भूपेश बघेल ने जो टिप्पणी की है कि वह किसी समाज पर नहीं की है वह व्यक्ति पर की है।
टीएस सिंहदेव सच कह रहे हैं लेकिन आधा सच कह रहे हैं। यह तो सच है कि भूपेश बघेल ने डिप्टी सीएम साव की तुलना बंदर से की है लेकिन वह यह भूल कैसे गए कि डिप्टी सीएम साव साहू समाज के बड़े नेता हैं।उनके खिलाफ कुछ कहे पर साहू समाज को भी बुरा लग सकता है। .यह तो बोलने वाले की जिम्मेदारी है कि वह जब कुछ कहता है तो इस बात ख्याल भी रखे कि व्यक्ति जिस समाज का है,उस समाज को उसका कहना बुरा न लगे। भूपेश बघेल जैसे बड़े नेता से ऐसे चूक की उम्मीद तो नहीं की जाती है लेकिन यह चूक तो उनसे हो गई है। सब यही तो कह रहे हैं कि भूपेश बघेल जैसे बड़े नेता से ऐसी चूक कैसे हो सकती है,उनसे तो ऐसी चूक नहीं होनी चाहिए। बड़े नेता से तो यही उम्मीद की जाती है कि वह कुछ कहे तो इस तरह से कहे, ऐसे शब्दों का प्रयोग करे कि किसी व्यक्ति को, किसी समाज को बुरा न लगे।
राजनीति में रोज नेताओं को बोलना रहता है तो रोज बोलते वक्त किसी दिन चूक हो जाती है और दूसरों को मौका मिलता है बोलने का और वह पुराना सब हिसाब चुकता कर देते हैं। बलौदाबाजार हिंसा मामले में साय सरकार ने दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी तो कांग्रेस ने इसे मौके का लाभ उठाकर यह प्रचार किया था कि साय सरकार सतनामी समाज के लोगों को परेशान कर रही है। तब कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ सतनामी समाज को खड़े करने का प्रयास किया था। राजनीति में ऐसा होता रहता है, सारे राजनीतिक दल ऐसा करते हैं। उनको मौका मिलता है तो वह किसी राजनीतिक दल या सरकार के खिलाफ समाज को खडा करने का प्रयास करते हैं ताकि उनको राजनीतिक लाभ हो और दूसरे को राजनीतिक रूप से नुकसान हो। इस बार भूपेश बघेल के खिलाफ साहू समाज को खड़ा करने का प्रयास किया गया है। भूपेश बघेल माफी मांगेंगे ताे माना जाएगा कि उनसे चूक हुई है, नहीं मांगेंगे तो राजनीतिक रूप उनको और कांग्रेस का नुकसान होगा।
