आतंकवाद और क्षेत्रीय चुनौतियों पर भारत के साथ सहयोग बढ़ाने को तैयार है ईरान
नई दिल्ली { गहरी खोज }: ईरान ने आतंकवाद से निपटने और क्षेत्रीय अस्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत के साथ सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई है। भारत में ईरान के नवनियुक्त राजदूत मोहम्मद फतहली ने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे की स्वतंत्र नीतियों और राष्ट्रीय हितों का पूरा सम्मान करते हुए साझा चुनौतियों पर मिलकर काम कर सकते हैं।
मंगलवार को पीटीआई वीडियो को दिए एक साक्षात्कार में राजदूत फतहली ने कहा कि चरमपंथी हिंसा से निपटने के अनुभवों को साझा करने की काफी गुंजाइश है। उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों, नवीकरणीय ऊर्जा, शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक सहयोग और सांस्कृतिक कूटनीति के क्षेत्रों में भी भारत के साथ नई पहलों की मजबूत संभावनाओं पर जोर दिया।
फतहली ने कहा, “आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता ऐसे क्षेत्र हैं, जहां ईरान और भारत एक-दूसरे की स्वतंत्र नीतियों और राष्ट्रीय हितों का पूरा सम्मान करते हुए सहयोग का विस्तार कर सकते हैं।” उन्होंने मई में भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ की गई कार्रवाइयों और क्षेत्रीय तनावों के बीच ईरान की अपनी चुनौतियों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से आतंकवाद का शिकार रहा है और चरमपंथी हिंसा से मुकाबले में उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी है। “इस लड़ाई में हमने अपने कई बेहतरीन कमांडरों और सैनिकों को खोया है, जो आतंकवाद से निपटने के प्रति हमारी गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है,” उन्होंने कहा।
राजदूत ने बताया कि ईरान ने आतंकवाद-रोधी प्रयासों में व्यापक विशेषज्ञता विकसित की है, जिसे वह अपने “मित्र देशों” के साथ साझा करने को तैयार है। अपने पूर्ववर्ती राजदूत डॉ. इराज एलाही का उल्लेख करते हुए फतहली ने कहा कि उनकी प्राथमिकता उनके द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों को आगे बढ़ाना और साथ ही नई पहलों की शुरुआत करना होगी।
उन्होंने कहा, “मेरी प्राथमिकता इन महत्वपूर्ण उपलब्धियों की निरंतरता सुनिश्चित करना और उन्हें और मजबूत करना होगा। नियमित राजनीतिक संवाद को सशक्त करना, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग का विस्तार करना तथा दोनों देशों के निजी क्षेत्रों के बीच सहभागिता बढ़ाना हमारे प्रमुख फोकस क्षेत्र रहेंगे।”
फतहली ने एकतरफा प्रतिबंधों, बैंकिंग प्रतिबंधों, निजी क्षेत्रों में सीमित जागरूकता और लॉजिस्टिक समस्याओं जैसी चुनौतियों को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान टिकाऊ वित्तीय व्यवस्थाओं, सरल व्यापार प्रक्रियाओं और दोनों देशों के कारोबारी समुदायों के बीच सीधे संपर्क को मजबूत करके किया जा सकता है।
भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार फिलहाल अपने ऐतिहासिक शिखर से काफी नीचे है, जिसका मुख्य कारण ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध हैं। वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग 2.3 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 1.25 अरब डॉलर और आयात 1.06 अरब डॉलर का था।
यह व्यापार 2018-19 के लगभग 17 अरब अमेरिकी डॉलर के शिखर स्तर की तुलना में करीब 87 प्रतिशत कम है, जब भारत के आयात में कच्चे तेल की बड़ी हिस्सेदारी थी। अमेरिका द्वारा दी गई छूट समाप्त होने के बाद भारत ने मई 2019 में ईरान से कच्चे तेल का आयात रोक दिया था।
राजदूत ने चाबहार बंदरगाह परियोजना के रणनीतिक महत्व को भी रेखांकित किया और इसे क्षेत्रीय संपर्क का एक अहम स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारत को अफगानिस्तान, मध्य एशिया और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे तक पहुंच प्रदान करती है। फतहली ने कहा, “परिवहन समय और लागत को कम करके यह कनेक्टिविटी ढांचा क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत कर सकता है और सभी भागीदार देशों के लिए व्यापारिक लचीलापन बढ़ा सकता है।” उल्लेखनीय है कि राजदूत मोहम्मद फतहली ने 15 दिसंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के समक्ष अपने परिचय पत्र प्रस्तुत किए थे।
