कांग्रेस को जनता की आवाज बनने की जरूरत है…
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: ऐसा कई बार ऐसा होता है कि नेता को पता नहीं रहता है कि उसका लक्ष्य क्या है तो वह खुद कनफ्यूज रहता और उसके कारण पूरी पार्टी कनफ्यूज रहती है। किसी भी नेता के कनफ्यूज होने का पता उसके आचार विचार से चलता है। वह क्या कहता है, वह क्या करता है। इससे देश की जनता को पता चल जाता है कि यह नेता कितना कनफ्यूज है, नेता और उसकी पार्टी को सत्ता चाहिए तो उसे कहना चाहिए कि हमें सत्ता चाहिए। हमको सत्ता के लिए लिए चुनाव जीतना है। नेता को और पार्टी को सत्ता चाहिए और नेता कहे कि हमको सत्ता नहीं सत्य चाहिए तो ऐसी पार्टी व उसके नेता को जनता सत्ता क्यों देगी। वह खुद कह रहा है कि हमको सत्ता नहीं चाहिए। नेता जैसा चाहता है, जैसा सोचता है, जैसा करता है उसके आधार पर जनता उसका मूल्यांकन करती है और बता देती है उसका स्थान कहां पर है।
कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी ऐसे ही नेता है। उनको अपना लक्ष्य मालूम नहीं है, वह जनता को बता नहीं पाते हैं,समझा नहीं पाते हैं कि वह चाहते क्या हैं।महीनों तक उनके लिए एसआईआर सबसे बड़ा मुद्दा रहा, वोट चोरी सबसे बड़ा मुद्दा रहा।पर जनता को समझा नहीं पाए कि वोट चोरी कैसे हुई है। जनता को कहीं लग नहीं रहा था कि उसका वोट कोई चोरी कर रहा है ओर राहुल गांधी कह रहे हैं कि जनता का वोट चोरी हो रहा है।वह मानकर चल रहे थे कि इस मुद्दे से वह बिहार चुनाव जीत जाएंगे लेकिन जनता ने साफ कर दिया कि वह किसी भी मुद्दे को बड़ा मान सकते हैं लेकिन वह जरूरी नहीं है कि जनता के लिए भी बड़ा मुद्दा हो।राहुल गांधी को आज तक नहीं मालूम कि चुनाव कैसे मुद्दों से जीता जाता है, वह किसी भी मुद्दे को चुनाव जीतने वाला मुद्दा मान लेते है और जनता उसे नकार देती है।
कांग्रेस का स्थापना दिवस एक अहम दिन है कांग्रेस के लिए सोचने विचारने व कहने का और जनता को बताने का कि वह आने वाले दिनों में जनता के लिए क्या करने वाली है। राहुल गांधी बता रहे है कि कांग्रेस सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं है वह भारत की आत्मा की आवाज है।अगर ऐसा होता तो जनता कांग्रेस के साथ होती। जनता तो कई चुनावों में कांग्रेस को बता रही है कि वह उसके साथ नहीं है क्योंकि कांग्रेस को देश की आत्मा नहीं देश की जनता की आवाज बनने की जरूरत है। कांग्रेस देश की जनता का आवाज जब तक थी तब जनता कांग्रेस के साथ थी। अब देश की जनता को ऐसा लगता नहीं है कि कांग्रेस यह समझ भी पा रही है कि जनता क्या चाहती कांग्रेस को पता है। कांग्रेस को पता होता कि जनता क्या चाहती है तो वह चुनाव के बाद चुनाव हारती क्यों। जनता को ऐसे राजनीतिक दल की जरूरत नहीं है जो जनता के लिए कुछ करना नहीं चाहता है।बस बाते बड़ी करना चाहता है।
राहुल गांधी ने स्थापना दिवस के मौके पर कहा कि पार्टी हमेशा कमजोर,वंचित और मेहनतकश लोगों के साथ खड़ी रही है और आगे भी उनके लिए लड़ाई जारी रखेगी। यह राहुल गांधी का वहम है क्योंकि कांग्रेस जब तक गरीब,कमजोर के साथ खड़ी रही,गरीबी हटाने का वादा करती रही, तब तक गरीब व कमजोर आदमी भी उसके साथ खड़ा था, लेकिन बरसों सत्ता में रहने के बाद कांग्रेस ने गरीबी हटा नहीं पाई तो गरीब व कमजोर लोगों को लगा कि कांग्रेस कहती है, करती नहीं है, पीएम मोदी के रूप में उनको ऐसा नेता मिला जिसने गरीबों के कल्याण की बात कही और घर, पानी, बिजली, उपचार, शौचालय,गैस की सुविधा भी करोड़ों गरीबों को दी। तब देश के लोगों को लगा कि गरीबी इस तरह भी दूर की जा सकती है। गरीब को पीएम मोदी ने सुविधा दी है और यह उसके दिखता है मोदी ने क्या किया है उसके लिए।राहुल गांधी कहते है कि कांग्रेस गरीबों के साथ खड़ी रही है लेकिन गरीब आदमी को दिखता नहीं है कि कांग्रेस उसके साथ खड़ी है तो उसको क्या फायदा हो रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे स्थापना दिवस पर यह स्वीकार करते हैं कि कांग्रेस की शक्ति कम हुई है लेकिन वह यह स्वीकार नही कर रहे हैं कि कांग्रेस कमजोर हुई है, कांग्रेस चुनाव के बाद चुनाव हार रही है तो उसके लिए दोषी कौन है। वह खुद दोषी हैं तो उनको अध्यक्ष होने के नाते स्वीकार करना चाहिए कि उनके अध्यक्ष रहते कांग्रेस कमजोर हुई तो क्यों कमजोर हुई है, कांग्रेस उनके अध्यक्ष रहते चुनाव हारती जा रही है तो क्यों हारती जा रही है। कांग्रेस कमजोर हुई है तो उसे स्वीकारने से कांग्रेस मजबूत नहीं हो जाएगी। कांग्रेस संगठन कमजोर होने से कमजोर हुई है,कांग्रेस संगठन कमजोर होने से चुनाव के बाद चुनाव हार रही है। कांग्रेस के पास मजबूत अध्यक्ष न होने से चुनाव हार रही है, कांग्रेस के पास मजबूत नेता न होने से वह चुनाव हार रही है। दिग्विजय सिंह समेत कई कांग्रेस नेता कह रहे है कि कांग्रेस का संगठन कमजोर है, कांग्रेस का संगठन मजबूत करने की जरूरत है। भाजपा,आरएसएस संगठन की तरह मजबूत करने की जरूरत है।उन्हें गलत समझा जा रहा है। क्योंकि वफादारों को लगता है कि यह तो गांधी परिवार को कमजोर करने की कोशिश है। वफादारों को कौन समझाए कि गांधी परिवार के मजबूत होने से कांग्रेस मजबूत नहीं होती है। कांग्रेस चुनाव नहीं जीतती है।
