कमरे में फैले जहरीले धुएं से दम घुटने के कारण नाना-नाती की मौत

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नवादा{ गहरी खोज }: नवादा जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र अंतर्गत त्रिलोकी बिगहा गांव में ठंड से बचाव के लिए जलाई गई बोरसी जानलेवा साबित हुई। कमरे में फैले जहरीले धुएं से दम घुटने के कारण नाना-नाती की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य परिजन बेहोश हो गए। सभी को सोमवार सुबह सदर अस्पताल नवादा लाया गया, जहां चिकित्सकों ने दो लोगों को मृत घोषित कर दिया, जबकि तीन का इलाज जारी है। इस हृदयविदारक घटना से गांव में शोक है। मृतकों मे 70 वर्षीय श्रीकांत यादव और उनके नाती एक वर्षीय आशीष कुमार है।
घटना के संबंध में मृतक के एक अन्य नाती सूरज कुमार ने बताया कि रविवार की रात कड़ाके की ठंड से बचने के लिए एक ही कमरे में परिवार के पांच सदस्य सोए हुए थे। ठंड अधिक होने के कारण कमरे के भीतर बोरसी (अंगीठी) जलाई गई थी। रात भर कमरे का दरवाजा बंद रहने और पर्याप्त वेंटिलेशन न होने के कारण बोरसी से निकला धुआं कमरे में भरता चला गया। नींद में ही सभी लोग धुएं की चपेट में आ गए और बेहोश हो गए।
सोमवार सुबह जब काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो परिजन को अनहोनी की आशंका हुई। आवाज लगाने पर भी अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद स्थानीय मिस्त्री को बुलाकर किवाड़ तुड़वाया गया। अंदर का दृश्य देख परिजन स्तब्ध रह गए—कमरे में श्रीकांत यादव, उनके नाती एक वर्षीय आशीष कुमार सहित सभी पांच लोग बेहोशी की हालत में पड़े थे। आनन-फानन में ग्रामीणों की मदद से सभी को नवादा सदर अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद श्रीकांत यादव और आशीष को मृत घोषित कर दिया। वहीं मृतक की पत्नी, बेटी और एक नन्ही बच्ची बेहोशी की हालत में भर्ती हैं। चिकित्सकों के अनुसार, तीनों की स्थिति गंभीर लेकिन स्थिर बताई जा रही है और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट सहित आवश्यक उपचार दिया जा रहा है। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच में मौत का कारण कार्बन मोनोऑक्साइड गैस से दम घुटना बताया है।
घटना की सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और मामले की छानबीन शुरू कर दी। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थानाध्यक्ष ने बताया कि यह एक दुखद हादसा प्रतीत होता है, जिसमें ठंड से बचाव के लिए की गई असावधानी जानलेवा बन गई। यह घटना एक बार फिर सर्दियों में अंगीठी, बोरसी या कोयले से जलने वाले हीटर के इस्तेमाल में सावधानी बरतने की चेतावनी देती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बंद कमरे में ऐसी व्यवस्था अत्यंत खतरनाक होती है, क्योंकि इससे निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस रंगहीन और गंधहीन होती है, जो धीरे-धीरे जान ले सकती है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि ठंड से बचाव के लिए सुरक्षित उपाय अपनाएं और बंद कमरों में आग जलाने से बचें। गांव में शोक का माहौल है।

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