किसी भी नेता व कार्यकर्ता का ऐसी इच्छा करना स्वाभाविक है

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सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }:
राजनीति ही नहीं हर क्षेत्र में काम करने वाले लोग इसलिए काम करते हैं कि वह भविष्य में कुछ बनना चाहते हैं। हर क्षेत्र के लोग जो छोटे पद पर रहते हैं वह चाहते हैं कि वह भी एक दिन किसी बड़े पद पर पहुंचे।अपने जीवन में वह कई लोगों को छोटे पद से बड़े पद पहुंचते हुए देखते हैं तो स्वाभाविक रूप से वह भी कहते हैं कि एक दिन वह भी किसी बड़े पद पर पहुंचना चाहते हैं।हर कोई शुरुआत छोटे पद से करता है लेकिन वह चाहता है कि वह जिस संस्था,संगठन में काम करता है, वहां उसे भी उसी तरह बड़े पद पहुंचने का मौका मिले जिस तरह किसी दूसरे संगठन में मिलता है। एक संगठन में नेता व कार्यकर्ता को ऐसा करने का मौका नहीं मिलता है तो कभी कभी बरबस उसके मुंह से उस संस्था व संगठन की तारीफ निकल जाती है जहां जमीन पर बैठे कार्यकर्ता काे सबसे बड़े पद तक पहुंचने का मौका मिलता है। कांग्रेस के बड़े नेता दिग्विजय सिंह ने संघ व भाजपा की तारीफ इस बात के लिए की है कि वहां कार्यकर्ता को सीएम से लेकर पीएम बनने का मौका मिलता है तो संगठन की ताकत के कारण तो तारीफ यूं ही नहीं की है।
दिग्विजय सिंह कांग्रेस के बड़े नेता हैं। वह कुछ भी कहेंगे तो माना जाएगा कि उन्होंने ऐसा कहा है तो यूं नहीं कहा है, वह एक पार्टी के संगठन की तारीफ कर रहे है तो वह इस बात की शिकायत भी हो सकती है कि हमारे यहां कोई कार्यकर्ता सीएम से पीएम क्यों नहीं बन पाता है।सही मायने में यह दिग्विजय सिंह ही नहीं आम कांग्रेस कार्यकर्ता की शिकायत ही है कांग्रेस कार्यकर्ता को सीएम से लेकर पीएम बनने का मौका क्यों नही मिलता है,कांग्रेस कार्यकर्ता की बात सुनी क्यों नहीं जाती है। कांग्रेस में संगठन की मजबूती की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।यह कोई नहीं सोचता है कि संगठन मजबूत होगा तो इससे पार्टी मजबूत होगी।पार्टी मजबूत होगी तो वह चुनाव जीतेगी।दिग्विजय सिंह सीधे कह नहीं रहे है कि कांग्रेस में परिवार की मजबूती की ओर जितना ध्यान दिया जाता है,उतना ध्यान पार्टी के संगठन की मजबूती की ओर नहीं दिया जाता है क्योंकि कांग्रेस में ऐसा कहने की हिम्मत कोई नहीं करता है जिसे पार्टी में रहना है, उसे परिवार की मजबूती की बात कहनी होगी,परिवार की मजबूती को सबसे ज्यादा जरूरी बताना होगा। कांग्रेस के लिए मजबूत पार्टी जरूरी नहीं है,कांग्रेस के लिए गांधी परिवार सबसे ज्यादा जरूरी है, कांग्रेस के ज्यादातर नेता तो यही मानते हैं कि गांधी परिवार है इसलिए कांग्रेस पार्टी है, वह यह नहीं मानते हैं कि कांग्रेस है तो गांधी परिवार है।गांधी परिवार के बिना कांग्रेस नेता कांग्रेस की कल्पना ही नहीं कर सकते।वह तो मानते हैं कि जब तक गांधी परिवार है तबतक कांग्रेस है। गांधी परिवार रहेगा तो कांग्रेस भी रहेगी। गांधी परिवार नहीं रहेगा तो कांग्रेस भी नहीं रहेगी।
एक समय तो ऐसा भी था जब एक कांग्रेस नेता ने कहा था कि इंदिरा इज इंडिया और इंडिया इज इँदिरा। यानी देश की कल्पना भी कांग्रेस नेता गांधी परिवार के बिना नहीं कर सकते थे। गांधी परिवार कार्यकर्ता को सीएम तो बना सकता है, जिस कार्यकर्ता को चाहे गांधी परिवार सीएम बना सकता है। जब चाहे किसी सीएम को पद से हटा सकता है। ऐसा हुआ है इसलिए कांग्रेस के नेता यह नहीं कह सकते कि उनके यहां कार्यकर्ताओं को सीएम बनने का मौका नहीं मिलता है। उस कार्यकर्ता को ही मिलता है जो गांधी परिवार का वफादार होता है और अपनी वफादारी साबित करता रहता है।जहां तक पीएम पद का सवाल है तो उस पर गांधी परिवार का ही हक माना जाता है यानी कोई पीएम बनेगा तो वह गांधी परिवार से ही बनेगा।
यही बात कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं को बुरी लगती होगी कि भाजपा में ऐसा होता है कि जमीन पर बैठा हुआ सामान्य कार्यकर्ता सीएएम बनता है उसके बाद पीएम भी बनता है। भाजपा में ऐसा होता है तो कांग्रेस में ऐसा क्यों नहीं होता है। सबसे बड़ा पद भाजपा में कार्यकर्ता के लिए है तो सबसे बड़ा पद कांग्रेस में कार्यकर्ता के लिए क्यो नहीं है। गांधी परिवार या गांधी परिवार के वफादार के लिए ही क्यों है।कांग्रेस में उदाहरण दिया जा सकता है कि मनमोहन सिंह पीएम बने थे लेकिन सब जानते हैं कि वह योग्यता कारण बने नहीं थे, वह बनाए गए थे,गांधी परिवार ने उनको पसंद किया था इसलिए बनाए गए थे।वह गांधी परिवार के वफादार थे इसलिए बनाए गए थे,सब जानते हैं कि मनमोहन सिंह पीएम थे तो सुपर पीएम सोनिया गांधी थी।
भाजपा में कार्यकर्ता को सीएम से लेकर पीएम तक बनने का मौका है।यह मौका पीएम मोदी के आने के बाद से और ज्यादा कार्यकर्ताओं को मिल रहा है।कई राज्यों के सीएम भाजपा के कार्यकर्ता बनाए गए है।विष्णुदेव साय, भजन लाल, मोहन यादव, मोहन मांझी,योगी आदित्यनाथ, हेमंता विश्वशर्मा कई उदाहरण है। यही नहीं हाल में नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर भी यह संदेश दिया गया है कि भाजपा में ही ऐसा संभव है कि सामान्य कार्यकर्ता भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकता है। भाजपा में संगठन है, संगठन मे सिस्टम है, काम करने वाले कार्यकर्ताओं को पहचानने का। संगठन ऐसे कार्यकर्ताओं की पहचान करता है जो पार्टी के लिए काम करते हैं। काम में सफल रहते हैं। काम में सफल कार्यकर्ताओं को उनकी मेहनत का फल मिलता है। कार्यकर्ताओं को उनकी मेहनत का फल तब मिलता है जब पार्टी चुनाव जीतती है। इसलिए भाजपा के तमाम कार्यकर्ता यह समझते हैं कि उनको मेहनत का फल तब ही मिलेगा जब पार्टी चुनाव जीतेगी इसलिए भाजपा कार्यकर्ता अपनी पा्टी को जिताने के लिए बिना थके मेहनत करते रहते हैं। मेहनत का फल पार्टी को भी मिलता है और उनको भी मिलता है।

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