अरावली पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भूपेंद्र यादव ने किया स्वागत, नए उच्चस्तरीय समिति गठन को बताया अहम
नई दिल्ली{ गहरी खोज }: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को अरावली पर्वतमाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सरकार अरावली के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को दिए गए अपने फैसले में अरावली पर्वतमाला और पहाड़ियों की एक समान परिभाषा को स्वीकार करने से जुड़े निर्देशों को फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह परिभाषा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) की एक समिति द्वारा सुझाई गई थी। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने इस पूरे विषय की गहन और समग्र समीक्षा के लिए क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा है।
भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “मैं अरावली पर्वतमाला से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लगी रोक और इस मुद्दे के अध्ययन के लिए नई समिति के गठन का स्वागत करता हूं। अरावली के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से जो भी सहयोग मांगा जाएगा, हम उसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “वर्तमान स्थिति में, नई खनन लीज देने या पुरानी खनन लीज के नवीनीकरण पर पूर्ण प्रतिबंध जारी रहेगा।”
सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को अरावली पर्वतमाला और पहाड़ियों की एक समान परिभाषा को स्वीकार करते हुए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैले अरावली क्षेत्र में विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक नई खनन लीज देने पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने दुनिया की सबसे पुरानी पर्वतमालाओं में से एक अरावली की सुरक्षा के उद्देश्य से पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया था।
समिति ने सिफारिश की थी कि “अरावली पहाड़ी” की परिभाषा उन भू-आकृतियों के रूप में की जाए, जो निर्धारित अरावली जिलों में स्थानीय स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई पर स्थित हों। वहीं, “अरावली पर्वतमाला” को 500 मीटर के भीतर स्थित दो या अधिक ऐसी पहाड़ियों के समूह के रूप में परिभाषित किया गया था।
