मैसेज देना था हम सब धर्मांतरण के खिलाफ है…
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: कोई बड़ा आयोजन होता है तो उसका मकसद होता है मैसेज देना।धर्मांतरण के विरोध में छत्तीसगढ़ बंद कर यह मैसेज दे दिया गया कि राज्य के लोग धर्मांतरण के खिलाफ है और इसे अब सहन नहीं किया जाएगा। राज्य में हो रहे धर्मांतरण के विरोध में सर्व समाज छत्तीसगढ़ ने बुधवार को छत्तीसगढ़ बंद का आयोजन किया। बंद पूरी तरह सफल रहा। कोई भी बंद तब सफल होता है जब उसका समर्थन छत्तीसगढ़ चेंबर आफ कामर्स व इंडसट्रीज करता है।चेंबर ने बंद का समर्थन किया इसलिए छत्तीसगढ़ के बंद को व्यापारिक जगत को पूरा समर्थन मिला।राजधानी में सारे बाजार बंद, कई पेट्रोप पंप दोपहर तक नहीं खुले थे. गली मोहल्लों में भी दुकानें बंद थी।बंद पर चेंबर अध्यक्ष श्री थौरानी ने कहा कि आज के बंद ने यह साबित कर दिया है कि धर्मांतरण जैसे गंभीर मुद्दे पर प्रदेश व व्यापारिक समाज एक है।उन्होंने बंद को सफल बनाने के लिए सभी व्यापारिक संगठनों व सामाजिक संगठनों का आभार भी माना।यह साफ भी किया कि व्यापारी समाज सदैव अपनी संस्कृति व सामाजित मूल्यों की रक्षा के लिए अग्रणी भूमिका निबाहता रहेगा।
धर्मांतरण के बढ़ते मामलों के विरोध में राजधानी रायपुर की सड़कों पर व्यापक जनाक्रोश देखने को मिला।राजधानी में निकाली गई जनआक्रोश रैली के माध्यम से धर्मांतरण के विरुध्द पुरजोर आवाज उठाई गई। रैली में धर्मांतरण बंद करो,संस्कृति की रक्षा करेंगे जैसे नारे लगाए गए।रैली में शामिल लोगों ने साफ कहा कि धर्मांतरण एक सामाजिक समस्या है.यह दीर्घकालिक रूप में सामाजिक स्थिरता व व्यापारिक वातावरण को भी प्रभावित करता है, इसलिए इसका विरोध को खुलकर किया जाना चाहिए। लोगों ने यह भी कहा कि हम किसी धर्म के खिलाफ नहीं है लेकिन प्रलोभन व दवाब से कराया जा रहा धर्मांतरण सहन नहीं किया जाएगा।व्यापारी समाज हमेशा से संस्कृति का संवाहक रहा है,इसलिए आज हम सर्व समाज के साथ कंधे से कंधे मिलाकर खड़ा है।
जब भी छत्तीसगढ़ बंद को अघोषित रूप से सरकार व प्रशासन समर्थन मिलता है तो बंद को व्यापक समर्थन भी मिलता है, सभी संगठन बंद का खुलकर समर्थन करते हैं,इस बार भी ऐसा हुआ है। चेंबर आफ कामर्स ने भी इसी वजह से खुलकर बंद का समर्थन किया और धर्मांतरण का खुलकर विरोध भी किया। जैसा की हमेशा बंद को सुबह से सफल बनाने के लिए लोग वाहनों में निकलते हैं और जहां भी उनको बंद नहीं मिलता है तो वह वहां विरोध करते हैं, युवा लोगों में जोश ज्यादा होता है तो तोड़फोड़ व मारपीट भी कहीं कहीं हो जाती है,इस बार भी कहीं कहीं ऐसा हुआ। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शांति कायम की। होते यह किसी न किसी संगठन के लोग है लेकिन मारपीट तोड़फोड़ पर होने पर सभी संगठन वाले कह देते हैं, वह उनके संगठन के नहीं थे। मान लिया जाता है कि वह उप्रद्रवी थे, उनके खिलाफ पुलिस भी जुर्म दर्ज कर बता देती है कि उसने अपना काम बखूबी किया है।
कांग्रेस बंद कराती है तो बंद सफल नहीं होता है और दूसरे सगंठन ने धर्मांतरण के विरोध में छत्तीसगढ़ बंद कराया तो वह सफल रहा तो यह कांग्रेस को अच्छा नहीं लग सकता। क्योंकि इससे साबित होता है कि कांग्रेस ज्यादा प्रभावशाली व शक्तिशाली नही है। जनता को वह प्रभावित नहीं कर पाती है।इसलिए छत्तीसगढ़ बंद के विषय में कांग्रेस की तरफ से कहा गया कि तथाकथित सर्व समाज के नाम पर जबरिया छत्तीसगढ़ बंद कराने का प्रयास सरकार व आरएसएस प्रायोजित था।प्रदेश भर में बंद समर्थकों ने पुलिस संरक्षण में आतंक फैलाया।भाजपा की तरफ से कहा गया कि धर्मांतरण के विरुद्ध जनजाति समाज व पूरा प्रदेश एकजुट है।छत्तीसगढ़ बंद से पूरे प्रदेश व देश में संदेश गया है कि भय,दवाब, प्रलोभन के जरिए किया जा रहा धर्मांतरण स्थायी रूप से रोका जाए और भाजपा इसे रोकने के लिए जल्द कानून लाएगी।
शहर में भाजपा के पक्ष में कुछ हो तो कांग्रेस के लिए जरूरी हो जाता है कि वह लोगो को बताए कि भाजपा के शासन में क्या कुछ गलत हो रहा है। वैसे तो कांग्रेस हिंदुओं के साथ कुछ होता है तो उसके साथ खड़ी नहीं होती हैं लेकिन जब उसे यह बताना हो कि भाजपा सरकारें हिंदुओं की रक्षा न तो देश में कर पा रही है और न ही विदेश में कर पा रही है तो वह ऐसा शो करती है जैसे वही हिंदुओं की सबसे बड़ी हितैषी है। राजनीति के लिए कांग्रेस ने जयस्तंभ चौक में केरल व बांग्लादेश में हिंदू नागरिकों की हत्या को लेकर प्रदर्शन किया। इसके लिए आरएसएस व भाजपा द्वारा वर्षों से फैलाए जा रहे नफरत, उन्माद व पहचान आधारिक राजनीति को कारण बताया।राजनीति में तो एक पक्ष दूसरे पक्ष के विरोध मे ही खड़ा होता है लेकिन कभी कभी वे ऐसे मुद्दे भी उठाते हैं कि जनता को यकीन नहीं होता है कि यह कह रहे है तो सही कह रहे है या नाटक कर रहे हैं।
