जेल भेजे गए पर सड़क पर मनमानी बंद नहीं हुई

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सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }:
आम तौर पर माना जाता है कि कानूनी कार्रवाई करके अपराध को रोका जा सकता है,रोका न जा सके तो उसे कम तो किया जा सकता है। कई बार ऐसा होता है कि अपराध को रोकने के लिए की जाने वाली कानूनी कार्रवाई का कोई खास असर नहीं होता है। कानूनी कार्रवाई होती रहती है और कुछ लोगों की सड़क पर मनमानी चलती रहती है, उनको पकड़कर जेळ भेजा जाता है लेकिन इससे सड़क पर मनमानी नहींं रुकती है, सड़क पर बर्थ-डे मनाने वाले, सड़क पर स्टंट करके रील बनाने वाले न तो कानूनी कार्रवाई से डरते है और न ही उनको ऐसा लगता है कि वह कोई गलत काम कर रहे हैं, उनको लगता है कि वह जो कुछ कर रहे हैं,सही कर रहे हैं, इसलिए ११ महीने में सड़क पर मनमानी करने वाले ६६ लोगों को जेल भेजा गया।
११ महीने में ६६ लोगों को जेल भेजे जाने से साफ है कि पुलिस तो कार्रवाई कर रही है लेकिन पुलिस की कार्रवाई को सड़क पर मनमानी करने वालाें पर कोई खास असर हुआ नहीं है। पुलिस की कार्रवाई का असर हुआ होता तो ११ महीने में ६६ लोगों पर पुलिस को कार्रवाई नहीं करनी पड़ती है। पहले दूसरे मामले में कार्रवाई होने पर ही सड़क पर मनमानी करने वाले मनमानी बंद कर देते। पुलिस कार्रवाई करती रहे लेकिन सड़क पर मनमानी करने वालों ने सड़क पर मनमानी जारी रखी यानी कि उन्होंने साफ कर दिया कि पुलिस को जितनी कार्रवाई करनी है करती रहे, उनको सड़क पर बर्थ डे मनाना है तो वह तो मनाएंगे ही,उनको सड़क पर वाहनों के साथ स्टंट करना है तो वह तो स्टंट करेंगे ही।
सड़कों पर मनमानी से आम लोगों को परेशानी होती है और वह इस बात के लिए नाराजगी भी जाहिर करते हैं। इससे रसूखदार लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता है, वह मनमानी करते रहते हैं। उनकी मनमानी के लिए हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है, चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने और बीडी गुरु की बेंच ने कहा है कि अमीर व प्रभावशाली लोग यातायात नियमों की नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। राज्य सरकार ने गाइड लाइन बनाई है लेकिन उस पर अमल नहीं हो रहा है, वह कागजों तक ही सीमित है। हाल ही में वायरल हुए एक वीडियों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को व्यक्तिगत शपथ पत्र देने का आदेश भी दिया है। वायरल वीडियो में एक युवक कार की बोनट पर बैठकर स्टंट कर रहा है और कह रहा है कि इलाके में उसकी दबंगई है, उसे कोई छू नहीं सकता।
सड़क पर मनमानी करने वाले लोग पैसे वाले होते है या रील बनाने वाले होते हैं। उनका मकसद होता है कि यह बताना कि हम सड़क पर मनमानी कर रहे हैं, हम खास है, इसलिए ऐसा कर रहे हैं। वह एक तरह से लोगों को परेशान करके खुश होने वाले होते हैं। वह देखते हैं कि लोगों को उनके कारण परेशानी हो रही है तो वह खुश होते हैं। पहले पुलिश तो ऐसे मामले में कोई कार्रवाई नहीं करती थी,वह यह कहकर बच जाती थी कि किसी ने इस बात की शिकायत नहीं की है। जब से हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है, उसके बाद से पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है।
आंकड़ों के मुताबिक तो पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर बीते ११ महीने में सड़क पर बर्थ डे मनाने व स्टंट करने के १२ मामले दर्ज किए है,६६ लोगों को जेल भेजा है,३० वाहन जब्त किए हैं।१३ वाहनचालकों के लाइसेंस निलंबित कराए गए हैं। रील बनाने वालों के खिलाफ पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है,जुर्माना भी वसूला है।यही नहीं पुलिस ने कई बार आम नागरिकों खास कर युवाओं से अपील भी की है कि सार्वजनिक सड़कों पर बर्थ डे न मनाएं,स्टंटबाजी से बचे,यह कानूनन अपराध है, इससे लोगों को परेशानी होती है।गंभीर हादसा हो सकता है और जान भी जा सकती है। इस बात में दो मत नहीं है कि हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस व प्रशासन सड़क पर मनमानी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तो कर रहे हैं लेकिन अफसोस इस बात का है कि कार्रवाई के बाद भी सड़क पर लोगों की मनमानी खत्म नहीं हो रही है।

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